
संवाद 24 डेस्क। पृथ्वी से सूर्य ग्रहण देखना अपने आप में दुर्लभ और रोमांचक खगोलीय अनुभव माना जाता है, लेकिन अंतरिक्ष से दिखाई देने वाला दृश्य कई बार इंसानी कल्पना से भी आगे निकल जाता है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर मौजूद NASA के अंतरिक्ष यात्रियों जेसिका मीर और जैक हैथवे ने हाल में अपने अंतरिक्ष अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके लिए उत्तरी और दक्षिणी रोशनी यानी ऑरोरा का नजारा सूर्य ग्रहण से भी अधिक शानदार रहा। दोनों अंतरिक्ष यात्री करीब छह महीने से अंतरिक्ष स्टेशन पर हैं और उन्होंने द एसोसिएटेड प्रेस (AP) से बातचीत में बताया कि पिछले सप्ताह हुए सूर्य ग्रहण के दौरान ISS की स्थिति के कारण वे पूर्ण ग्रहण नहीं देख सके, हालांकि उन्हें आंशिक ग्रहण का दृश्य जरूर मिला।
पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने से चूक गए अंतरिक्ष यात्री
12 अगस्त 2026 को हुआ पूर्ण सूर्य ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में बेहद चर्चित रहा। NASA के अनुसार इसका पूर्ण चरण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से देखा गया, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई दिया।
धरती पर लाखों लोगों ने इस खगोलीय घटना को देखने के लिए आसमान की ओर नजरें टिकाईं, वहीं ISS पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को इसका अलग अनुभव मिला। अंतरिक्ष स्टेशन की कक्षीय स्थिति ऐसी थी कि वे पूर्णता यानी totality के रास्ते में नहीं थे। इसलिए उन्हें पूर्ण सूर्य ग्रहण के बजाय आंशिक ग्रहण देखने को मिला। हालांकि, अंतरिक्ष से पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति को देखने का अपना अलग वैज्ञानिक और दृश्यात्मक महत्व है।
लेकिन फिर ऐसा क्या दिखा कि ग्रहण भी फीका लगा?
जेसिका मीर के अनुसार, अंतरिक्ष से दिखाई देने वाला ऑरोरा इतना प्रभावशाली था कि उसे ग्रहण से भी अधिक शानदार अनुभव कहा जा सकता है। खास तौर पर एक शक्तिशाली सौर गतिविधि के बाद दिखाई दिया हरा ऑरोरा ISS के नीचे बिल्कुल करीब नजर आया। मीर ने इसकी तुलना एक ऐसी हरी आकृति से की जो स्टेशन के नीचे सांप की तरह आगे बढ़ रही हो। उन्होंने यह भी बताया कि हरी रोशनी अंतरिक्ष स्टेशन के सफेद बाहरी हिस्से पर प्रतिबिंबित होती दिखाई दे रही थी।
धरती से ऑरोरा आमतौर पर आकाश में दूर चमकती हरी, लाल या बैंगनी रोशनी के रूप में दिखाई देता है। लेकिन अंतरिक्ष से देखने पर अंतरिक्ष यात्री इस रोशनी को पृथ्वी के वायुमंडल के चारों ओर फैली विशाल चमकती परत के रूप में देख सकते हैं। यही अंतर इस अनुभव को जमीन से देखे जाने वाले ऑरोरा से भी अलग बना देता है।
आखिर ऑरोरा बनता कैसे है?
ऑरोरा केवल सुंदर रोशनी नहीं, बल्कि सूर्य और पृथ्वी के बीच होने वाली जटिल अंतरिक्ष मौसम प्रक्रिया का परिणाम है। NASA के अनुसार ऑरोरा सूर्य से आने वाले ऊर्जावान कणों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के बीच होने वाली प्रक्रिया से पैदा होता है। जब सूर्य से आने वाले आवेशित कण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल तक पहुंचते हैं, तो वे वहां मौजूद परमाणुओं और अणुओं को ऊर्जा प्रदान करते हैं। बाद में जब ये कण अपनी ऊर्जा छोड़ते हैं, तो प्रकाश उत्पन्न होता है। इसी प्रकाश को हम ऑरोरा के रूप में देखते हैं।
रंग भी अलग-अलग परिस्थितियों में अलग दिखाई दे सकते हैं। ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसे वायुमंडलीय घटकों के साथ ऊर्जावान कणों की अंतःक्रिया ऑरोरा के रंग और ऊंचाई को प्रभावित करती है। NASA ने अंतरिक्ष से लिए गए कई चित्रों में हरे, लाल और अन्य रंगों की ऑरोरल चमक दर्ज की है।
सूर्य की बढ़ी गतिविधि ने बढ़ा दी ऑरोरा की चमक
मीर ने बताया कि सूर्य की सक्रियता ने उत्तरी और दक्षिणी रोशनी को ज्यादा नाटकीय और चमकीला बनाया है। सौर गतिविधि बढ़ने पर सूर्य से निकलने वाले आवेशित कणों और प्लाज्मा की घटनाएं पृथ्वी के अंतरिक्ष वातावरण को प्रभावित कर सकती हैं। जब ऐसी घटनाएं पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराती हैं, तो ऑरोरा अधिक मजबूत और व्यापक हो सकता है।
NASA के 2026 विज्ञान कैलेंडर में भी अंतरिक्ष से दिखाई दिए एक बेहद प्रभावशाली लाल ऑरोरा का उल्लेख है। अक्टूबर 2024 में शक्तिशाली सौर गतिविधि के दौरान NASA के अंतरिक्ष यात्रियों डॉन पेटिट और मैथ्यू डोमिनिक ने ISS से गहरे लाल रंग के ऑरोरा को देखा था। NASA के अनुसार उस घटना का संबंध सूर्य से निकली X1.8 श्रेणी की सौर ज्वाला से था।
अंतरिक्ष से ऑरोरा को देखने का अनुभव इतना अलग क्यों?
पृथ्वी की सतह से ऑरोरा देखने वाले व्यक्ति के लिए यह आकाश में चमकती रोशनी है, लेकिन ISS से देखने पर पूरा दृश्य बदल जाता है। अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की वक्रता, वातावरण की पतली परत और उसके ऊपर फैली ऑरोरल चमक को एक साथ देख सकते हैं। NASA द्वारा जारी तस्वीरों में कई बार ऑरोरा पृथ्वी के क्षितिज के ऊपर चमकती हुई दिखाई देती है। जून 2026 में NASA ने जेसिका मीर द्वारा ISS से ली गई ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस की तस्वीर भी साझा की थी, जो पृथ्वी के ऊपर फैली इस प्राकृतिक रोशनी का शानदार दृश्य दिखाती है।
ISS लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इस ऊंचाई से अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की सतह के साथ-साथ उसके वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में होने वाली घटनाओं को व्यापक दृष्टिकोण से देखने का अवसर मिलता है। NASA के अनुसार ISS से लिए गए क्रू फोटोग्राफ पृथ्वी के पर्यावरण और वायुमंडलीय घटनाओं के अध्ययन में भी उपयोगी हैं।
सूर्य ग्रहण और ऑरोरा में क्या अंतर है?
सूर्य ग्रहण और ऑरोरा दोनों ही बेहद आकर्षक खगोलीय घटनाएं हैं, लेकिन इनके पीछे की वैज्ञानिक प्रक्रियाएं बिल्कुल अलग हैं। सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूरी तरह ढक देता है। 12 अगस्त 2026 का ग्रहण इसी प्रकार की खगोलीय स्थिति का परिणाम था।
इसके विपरीत ऑरोरा सूर्य से आने वाले आवेशित कणों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र तथा ऊपरी वायुमंडल के बीच होने वाली अंतःक्रिया का परिणाम है। इसलिए ग्रहण मुख्य रूप से सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की ज्यामितीय स्थिति पर निर्भर करता है, जबकि ऑरोरा का संबंध अंतरिक्ष मौसम और सौर गतिविधि से भी गहराई से जुड़ा है।
अब अगली खगोलीय घटना पर अंतरिक्ष यात्रियों की नजर
सूर्य ग्रहण का पूर्ण चरण भले ही ISS पर मौजूद मीर और हैथवे को नहीं मिल पाया, लेकिन दोनों ने अब अगले खगोलीय आकर्षण पर नजरें लगा रखी हैं। AP के अनुसार दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को अगले सप्ताह होने वाले चंद्र ग्रहण को देखने की उम्मीद है। NASA के अनुसार 27-28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जो अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के बड़े हिस्सों से दिखाई देने वाला है।
NASA के मुताबिक इस चंद्र ग्रहण के चरम पर चंद्रमा का लगभग 93 प्रतिशत व्यास पृथ्वी की गहरी छाया यानी umbra में होगा। चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में नहीं जाएगा, लेकिन उसका एक बड़ा हिस्सा गहरा और तांबे जैसी लालिमा लिए दिखाई दे सकता है।
अंतरिक्ष में जीवन सिर्फ विज्ञान और प्रयोगों तक सीमित नहीं
ISS पर अंतरिक्ष यात्रियों का जीवन केवल वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी कार्यों तक सीमित नहीं है। मीर और हैथवे ने बातचीत में अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने दैनिक जीवन और मनोरंजन से जुड़े अनुभव भी साझा किए। मीर ने अंतरिक्ष में खाना बनाने और स्टेशन पर उगाई गई सब्जियों का इस्तेमाल करने जैसे अनुभवों का उल्लेख किया, जबकि संगीत और अन्य गतिविधियां भी अंतरिक्ष यात्रियों के खाली समय का हिस्सा हैं।
यह पहलू महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरिक्ष मिशन कई महीनों तक चल सकते हैं और इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य, मनोरंजन तथा टीम के बीच सामंजस्य भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है जितना वैज्ञानिक काम।
अंतरिक्ष से दिखती पृथ्वी, बदल देती है देखने का नजरिया
ISS से पृथ्वी को देखने का अनुभव अंतरिक्ष यात्रियों के लिए केवल एक दृश्य अनुभव नहीं है। पृथ्वी की पतली वायुमंडलीय परत, उसके ऊपर चमकती ऑरोरा और नीचे फैला विशाल ग्रह उन्हें यह देखने का अवसर देते हैं कि हमारा ग्रह अंतरिक्ष के व्यापक वातावरण में कितना नाजुक दिखाई देता है।
ऑरोरा की खूबसूरती के पीछे जहां सूर्य और पृथ्वी के बीच चलने वाली जटिल भौतिक प्रक्रिया है, वहीं इन घटनाओं का अध्ययन वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष मौसम को समझने में भी मदद करता है। शक्तिशाली सौर घटनाएं उपग्रहों, संचार प्रणालियों और अन्य अंतरिक्ष-आधारित तकनीकों को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ऑरोरा केवल देखने लायक प्राकृतिक दृश्य नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन का भी महत्वपूर्ण विषय है।
अंतरिक्ष से प्रकृति का हर रूप बदल जाता है
धरती से देखने पर सूर्य ग्रहण एक असाधारण खगोलीय घटना है और इसे देखने के लिए लोग विशेष तैयारियां करते हैं। लेकिन ISS पर मौजूद NASA के अंतरिक्ष यात्रियों का अनुभव बताता है कि अंतरिक्ष में प्रकृति का कोई दूसरा दृश्य भी उससे कहीं अधिक प्रभावशाली लग सकता है। जेसिका मीर और जैक हैथवे के लिए सूर्य ग्रहण भले ही पूर्ण रूप में दिखाई नहीं दिया, लेकिन पृथ्वी के नीचे नाचती हरी ऑरोरल रोशनी ने उस कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया।
इस घटना की सबसे दिलचस्प बात यही है कि जिस सूर्य की वजह से पृथ्वी पर जीवन संभव है, उसी सूर्य की गतिविधियां अंतरिक्ष में ऐसी रोशनी भी पैदा कर सकती हैं जो अंतरिक्ष यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर दे। ग्रहण कुछ मिनटों का अंधेरा दिखाता है, जबकि ऑरोरा सूर्य और पृथ्वी के बीच चल रही विशाल अंतरिक्षीय गतिविधि को रंगों में सामने लाता है। शायद यही वजह है कि अंतरिक्ष से देखने पर कभी-कभी आसमान का सबसे बड़ा शो वह नहीं होता, जिसकी धरती पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही हो।






