क्या मुनाफे के लिए छिपाई गई किशोरों की मानसिक सेहत की सच्चाई? मेटा पर 29 अमेरिकी राज्यों ने ठोका मुकदमा

​संवाद 24 नई दिल्ली।​ सोशल मीडिया की चकाचौंध के पीछे छिपा स्याह सच अब अमेरिका की अदालतों में खुलकर सामने आ रहा है। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा (Meta) पर 29 अमेरिकी राज्यों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए एक ऐतिहासिक मुकदमा शुरू किया है। वकीलों और राज्य अटॉर्नी जनरलों का आरोप है कि मेटा प्रबंधन पूरी तरह से जानता था कि इंस्टाग्राम किशोरों और बच्चों के लिए लत लगाने वाला (Addictive) प्लेटफॉर्म है और उनकी मानसिक सेहत को गंभीर नुकसान पहुँचा रहा है, फिर भी कंपनी ने अपनी आंतरिक रिसर्च रिपोर्ट को जनता और अभिभावकों से छिपाए रखा। कैलिफोर्निया के ओकलैंड स्थित फेडरल कोर्ट में शुरू हुए इस ऐतिहासिक जूरी ट्रायल में मेटा पर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के मुकाबले कॉर्पोरेट मुनाफे को तरजीह देने का आरोप लगाया गया है।

​”मेटा को सब पता था”: कोर्ट में पेश हुए आंतरिक दस्तावेज
ट्रायल के पहले दिन कैलिफोर्निया की डिप्टी अटॉर्नी जनरल मेगन ओ’नील ने जूरी के सामने शुरुआती दलीलें रखते हुए कहा कि बच्चों और किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य एक साझा सामाजिक जिम्मेदारी है, लेकिन मेटा ने जानबूझकर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ा। अदालत में कंपनी के कुछ गोपनीय अंदरूनी दस्तावेज और ईमेल भी सामने रखे गए। इनमें से एक दस्तावेज में साफ लिखा था, “कम उम्र वाले सबसे बेहतरीन उपभोक्ता हैं”। वहीं, एक अन्य आंतरिक रिपोर्ट में यह स्वीकार किया गया था कि “किशोर इस बात की परवाह किए बिना इंस्टाग्राम से चिपके रहते हैं कि यह उन्हें कैसा महसूस कराता है; इंस्टाग्राम सचमुच एक लत है”। सरकारी वकीलों ने जोर देकर कहा कि कंपनी के शीर्ष अधिकारियों को हर खतरे की जानकारी थी, लेकिन ‘प्रॉफिट’ के आगे सब कुछ दबा दिया गया।

​लत लगाने वाले फीचर्स और नियमों के उल्लंघन का आरोप
233 पन्नों के इस व्यापक मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि मेटा ने अपने ऐप्स में मनोवैज्ञानिक रूप से हेरफेर करने वाले फीचर्स विकसित किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
1- अनंत स्क्रॉलिंग (Infinite Scroll): यूजर को बिना रुके घंटों तक स्क्रीन से बांधे रखने वाला एल्गोरिदम।
2- लगातार नोटिफिकेशन्स: हर पल फोन चेक करने की बेचैनी पैदा करने वाले अलर्ट।
3- ब्यूटी फिल्टर्स और लाइक्स: किशोरियों और बच्चों में बॉडी इमेज को लेकर हीनभावना और चिंता (Anxiety) बढ़ाने वाले टूल्स।
इसके अलावा, मुकदमे में यह भी दावा किया गया है कि मेटा ने संघीय बाल ऑनलाइन गोपनीयता संरक्षण कानून (COPPA) का उल्लंघन करते हुए माता-पिता की अनुमति के बिना 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का डेटा नियमित रूप से एकत्र किया।

​मेटा की सफाई और संभावित अरबों डॉलर का जुर्माना
मेटा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने युवाओं को सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव देने के लिए 30 से अधिक टूल्स और सेफ्टी फीचर्स पेश किए हैं। कंपनी का तर्क है कि एज वेरिफिकेशन जैसी चुनौतियाँ पूरे टेक उद्योग से जुड़ी हैं और किसी भी राज्य के पास यह साबित करने का सबूत नहीं है कि नागरिकों को जानबूझकर गुमराह किया गया।
हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेटा इस मुकदमे में दोषी पाई जाती है, तो उस पर $200 बिलियन (करीब 200 अरब डॉलर) तक का भारी-भरकम जुर्माना लग सकता है। साथ ही अदालत कंपनी को अपने ऐप्स के डिजाइन में मौलिक बदलाव करने के लिए भी बाध्य कर सकती है। छह से आठ सप्ताह तक चलने वाले इस ट्रायल में मार्क जुकरबर्ग और एडम मोसेरी समेत कई शीर्ष टेक दिग्गजों की गवाही होने की संभावना है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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