क्या NTA से नहीं संभल रही परीक्षाएं? NEET के बाद अब UGC-NET में भारी गड़बड़ी, 3 बड़े विषयों की परीक्षा रद्द!

संवाद 24 नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए), एक बार फिर विवादों के गहरे भंवर में फंस गई है। अभी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) के पेपर लीक और उसमें हुई भयानक अनियमितताओं का मामला पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब उच्च शिक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाली यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षा में भी भारी गड़बड़ी का पर्दाफाश हुआ है। हालात इतने गंभीर हो गए कि एनटीए ने रविवार देर शाम एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए यूजीसी नेट के तीन सबसे अहम विषयों— अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्न पत्रों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। इस फैसले ने देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य पर एक बार फिर अनिश्चितता के काले बादल मंडरा दिए हैं। देश भर के युवा जो दिन-रात एक करके इन कठिन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, उनके लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। महीनों की कड़ी मेहनत, मानसिक तनाव और आर्थिक खर्च के बाद जब अचानक परीक्षा रद्द होने का फरमान आता है, तो छात्रों का व्यवस्था से मोहभंग होना स्वाभाविक है।

आखिर क्यों रद्द हुई परीक्षा? कारण जानकर रह जाएंगे हैरान
परीक्षा रद्द करने के पीछे एनटीए ने जो आधिकारिक कारण बताए हैं, वे किसी भी राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी के लिए शर्मिंदगी का विषय हैं। किसी एक सवाल में छपाई की गलती होना आम बात है, लेकिन एनटीए ने खुद स्वीकार किया है कि इन तीनों विषयों के प्रश्न पत्रों में भारी तथ्यात्मक भूलें (Factual Errors), टाइपिंग की बड़ी गलतियां और अनुवाद में भयानक चूक पाई गई है। स्थिति यहां तक खराब थी कि दुनिया के मशहूर विद्वानों के नामों की स्पेलिंग तक गलत लिखी गई थी, किताबों के शीर्षक गलत छपे थे, और सवालों की भाषा शैली तथा व्याकरण में लिंग व वचन की अशुद्धियां मौजूद थीं। देश के भावी प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं की परीक्षा लेने वाली शीर्ष संस्था द्वारा प्रश्न पत्र सेट करने में ऐसी बचकानी और गैर-जिम्मेदाराना गलतियां करना उसकी कार्यक्षमता पर सीधे तौर पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

क्या पेपर लीक का भी था अंदेशा?
मामला सिर्फ टाइपिंग या व्याकरण की गलती तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, इन तीनों विषयों के प्रश्न पत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे सवाल डाल दिए गए थे, जो पिछले सालों की परीक्षाओं में हूबहू पूछे जा चुके थे। एक ही पेपर में पुराने सवालों की इतनी बड़ी पुनरावृत्ति सामान्य बात नहीं मानी जाती। शिक्षा जगत के जानकारों का कहना है कि यह स्थिति किसी बड़े ‘पेपर लीक’ को छिपाने या किसी गहरी मिलीभगत की ओर भी इशारा कर सकती है। एनटीए ने अपने बयान में खुद माना है कि ये गलतियां इतनी व्यापक थीं कि इन्हें सामान्य ‘आंसर की चैलेंज’ (Answer Key Challenge) प्रक्रिया के जरिए नहीं सुधारा जा सकता था। इसी वजह से पूरी परीक्षा को रद्द करना ही एकमात्र विकल्प बचा था।

छात्रों के गुस्से का फूटा बम
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब छात्र पहले ही एनटीए की लेटलतीफी और अव्यवस्था को लेकर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दे चुके थे। 11 अगस्त को छात्रों ने एनटीए मुख्यालय के घेराव की खुली धमकी दी थी। इस बढ़ते दबाव के चलते एनटीए ने 87 में से 84 विषयों की प्रोविजनल उत्तर कुंजी (Answer Key) आनन-फानन में जारी कर दी थी, जिसके लिए छात्रों को 18 अगस्त तक अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया गया। लेकिन बाकी तीन विषयों के परिणाम को रोककर सीधे परीक्षा रद्द करने के इस ताजे फरमान ने परीक्षार्थियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

कब होगी दोबारा परीक्षा? (नया शेड्यूल)
छात्रों के भड़कते गुस्से को शांत करने के लिए एनटीए ने तुरंत दोबारा परीक्षा (Re-exam) की तारीखों का ऐलान कर दिया है। नए कार्यक्रम के अनुसार:
अंग्रेजी (English): 9 सितंबर 2026, पहली शिफ्ट (सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक)
कॉमर्स (Commerce): 9 सितंबर 2026, दूसरी शिफ्ट (दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक)
समाजशास्त्र (Sociology): 10 सितंबर 2026, पहली शिफ्ट (सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक)
एनटीए ने स्पष्ट किया है कि इस दोबारा परीक्षा में बैठने वाले किसी भी उम्मीदवार से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। परीक्षा के नए केंद्र, शहर की जानकारी और एडमिट कार्ड जल्द ही एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे।

अन्य 84 विषयों के परिणाम और आगे की राह
जिन 84 विषयों की परीक्षा सुचारू रूप से संपन्न हुई है, उनके परिणाम पहले से तय समय सीमा के भीतर ही जारी किए जाएंगे। एनटीए ने उम्मीदवारों को आश्वस्त किया है कि तीन विषयों के रद्दीकरण के कारण जेआरएफ (JRF) सीटों के आवंटन, असिस्टेंट प्रोफेसर की योग्यता सूची तैयार करने और पीएचडी (Ph.D.) एडमिशन के लिए ई-सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में कोई देरी नहीं होगी। नियमों के अनुसार, असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए योग्य उम्मीदवारों की संख्या, परीक्षा में शामिल कुल छात्रों के 6 प्रतिशत के बराबर ही रहेगी, इसमें किसी भी तरह की कोई कटौती नहीं की जाएगी।
कुल मिलाकर, यह ताजा घटना भारत की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली की कार्यकुशलता पर एक बड़ा दाग है। लाखों युवाओं का भविष्य जिन परीक्षाओं पर टिका है, उनमें ऐसी घोर लापरवाही छात्रों का मनोबल तो तोड़ती ही है, साथ ही पूरे सिस्टम से उनका विश्वास भी उठा देती है। सरकार और शिक्षा मंत्रालय को अब इन एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में युवाओं के करियर के साथ खिलवाड़ न हो। अब सबकी नजरें 9 और 10 सितंबर को होने वाली दोबारा परीक्षा पर टिकी हैं कि क्या यह बिना किसी विघ्न के संपन्न हो पाएगी?

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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