
संवाद 24 नई दिल्ली। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार देश को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक ताने-बाने और वैचारिक चुनौतियों पर एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को आगाह करते हुए कहा कि भले ही हथियारबंद नक्सलवाद अपने खात्मे की कगार पर पहुंच चुका है, लेकिन समाज में विभाजन और नकारात्मकता फैलाने वाले ‘दिमागी नक्सली’ (वैचारिक नक्सल) अब भी मौके की तलाश में हैं। उन्होंने विशेष रूप से देश की युवा पीढ़ी और जेन-ज़ी (Gen-Z) से इन विघटनकारी ताकतों को पहचानने और उनसे दूर रहने का आह्वान किया।
‘हथियारी नक्सल से ज्यादा खतरनाक है दिमागी नक्सल’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले दशकों में नक्सलवाद और माओवादी हिंसा ने देश के लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया और सुरक्षाबलों के हजारों जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी। कड़े नीतिगत कदमों और सुरक्षा अभियानों के कारण आज हथियारबंद नक्सलवाद का दौर लगभग समाप्त हो चुका है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि बंदूक उठाने वाले नक्सली तो पीछे हट गए, लेकिन वैचारिक रूप से अराजकता फैलाने वाले तत्व अब समाज और युवाओं की सोच को भ्रमित करने के लिए नए-नए षड्यंत्र रच रहे हैं। ये तत्व विकास की गति को रोकने, समाज को जातियों और वर्गों में बांटने तथा निराशा का माहौल बनाने की ताक में रहते हैं।
जेन-ज़ी (Gen-Z) और युवा शक्ति पर विशेष भरोसा
प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले के मंच से युवाओं और जेन-ज़ी पीढ़ी पर गहरा भरोसा जताते हुए उनसे राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना युवा शक्ति के कंधों पर टिका है। युवाओं को नकारात्मक और भड़काने वाले नैरेटिव से बचकर नवाचार, तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
युवाओं के लिए बड़े ऐलान: एआई ट्रेनिंग और फ्री कोचिंग
युवाओं को सशक्त बनाने के संकल्प के तहत प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं:
1 करोड़ युवाओं को एआई (AI) ट्रेनिंग: तकनीकी रूप से देश को अग्रणी बनाने के लिए अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
फ्री कोचिंग योजना: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रतिभाशाली युवाओं के लिए देशव्यापी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण फ्री कोचिंग की व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा।
‘सोच के बंधनों को तोड़कर आगे बढ़ेगा भारत’
प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि कई बार देश संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि नीतियों को बांधने वाली नकारात्मक सोच की वजह से रुकता है। अतीत की गलत और संकुचित सोच के कारण देश की विकास संभावनाओं को सीमित रखा गया था, लेकिन अब नया भारत खुले समुद्रों से लेकर अंतरिक्ष और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक हर क्षेत्र में अपनी क्षमताएं बढ़ा रहा है। उन्होंने 140 करोड़ नागरिकों से एकजुट होकर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने और सामाजिक सौहार्द को हर हाल में बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।






