
संवाद 24 नई दिल्ली। दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया से एक बेहद दिल दहला देने वाली और भयावह खबर सामने आ रही है। देश के पश्चिमी हिस्सों में अचानक आए एक अत्यंत शक्तिशाली और विनाशकारी भूकंप ने देखते ही देखते चारों तरफ मौत का तांडव मचा दिया है। इस प्रलयंकारी आपदा में अब तक कम से कम 111 मासूम लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। भूकंप की तीव्रता इतनी तेज थी कि कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में बहुमंजिला इमारतें, रिहाइशी मकान और अन्य ढाँचे ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस भयानक मंजर और तबाही की भयावहता को देखते हुए देश के राष्ट्रपति एबेलार्डो डी ला एस्प्रीला ने पूरे देश में राष्ट्रीय आपदा की स्थिति मानते हुए तुरंत आपातकाल (National Emergency) की घोषणा कर दी है।
7.4 की तीव्रता और जमीन के भीतर मची हलचल
भूवैज्ञानिक विशेषज्ञों और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, इस भीषण भूकंप की रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7.4 मापी गई, जो किसी भी क्षेत्र को मिनटों में मलबे के ढेर में तब्दील करने के लिए काफी है। यह प्रलयंकारी झटका कोलंबिया के चोको (Chocó) क्षेत्र के ग्रामीण हिस्से और सैन जोस डेल पाल्मार के पास केंद्रित था, जो देश की राजधानी बोगोटा से लगभग 400 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। यह झटका जमीन के भीतर करीब 107 किलोमीटर की गहराई में उत्पन्न हुआ था। इतनी गहराई होने के बावजूद इसकी प्रचंडता का असर सतह पर इस कदर दिखा कि सैकड़ों इमारतें भरभराकर जमींदोज हो गईं और लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कोलंबियाई भूवैज्ञानिक सेवा के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह बीते 10 वर्षों में देश में आया अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है। मुख्य झटके के बाद 2.8 से लेकर 4.8 तीव्रता तक के कई आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए हैं, जिसने लोगों के मन में दोबारा तबाही का खौफ पैदा कर दिया है।
पड़ोसी मुल्कों तक कांपी धरती, दहशत में बीते कई घंटे
कोलंबिया में आए इस विनाशकारी भूकंप का असर सिर्फ देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। इसके शक्तिशाली झटकों की गूँज पड़ोसी देशों तक महसूस की गई। इक्वाडोर, वेनेजुएला और पनामा जैसे सीमावर्ती देशों में भी धरती कांपने लगी और लोग जान बचाने के लिए बदहवास होकर अपने-अपने घरों और दफ्तरों से बाहर खुले मैदानों की तरफ दौड़ पड़े। हालांकि राहत की बात यह रही कि पड़ोसी मुल्कों से किसी बड़े जान-माल के नुकसान की तात्कालिक खबर नहीं आई है, लेकिन कोलंबिया के आंतरिक इलाकों में इसका प्रकोप विनाशकारी साबित हुआ।
मलबे में तब्दील हुए आशियाने, खुले आसमान नीचे रात बिताने को मजबूर लोग
भूकंप प्रभावित क्षेत्रों – विशेषकर चोको, रिसाराल्दा, वैले डेल कॉका और काल्डास में मंजर बेहद भयावह है। यहाँ की सड़कें, रिहाइशी कॉलोनियाँ और व्यावसायिक परिसर पूरी तरह तहस-नहस हो चुके हैं। मलबे के विशाल ढेरों के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। जान बचाने में सफल रहे हजारों नागरिक अब कड़ाके की ठंड और अनिश्चितता के बीच खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। बार-बार आ रहे आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) के डर से कोई भी व्यक्ति अपने क्षतिग्रस्त घरों के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
दुर्गम इलाकों में राहत और बचाव कार्य में भारी बाधाएँ
कोलंबियाई आपदा प्रबंधन टीमों, सेना और स्थानीय प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, सबसे ज्यादा प्रभावित चोको का इलाका एक अत्यंत दूर-दराज, गरीब और कठिन भौगोलिक संरचना वाला क्षेत्र माना जाता है। यहाँ सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, संचार व्यवस्था ठप हो गई है और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण राहत दस्तों को प्रभावित स्थलों तक पहुँचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। बचावकर्मी मलबे में दबे जीवित लोगों की तलाश के लिए स्निफर डॉग्स और आधुनिक जीवन-रक्षक उपकरणों का सहारा ले रहे हैं।
राष्ट्रपति ने संभाला मोर्चा, आपातकालीन फंड जारी
हालात की गंभीरता और मानवीय संकट को देखते हुए राष्ट्रपति एबेलार्डो डी ला एस्प्रीला ने राजधानी बोगोटा लौटकर तुरंत राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन इकाई (UNGRD) के क्राइसिस सेंटर में आपात बैठक बुलाई। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निशोध, चिकित्सीय सहायता और भोजन वितरण के लिए विशेष राहत फंड जारी कर दिया है। राष्ट्रपति ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार इस मुश्किल घड़ी में हर पीड़ित परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है और आखिरी व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक बचाव अभियान बिना रुके जारी रहेगा।






