आधी रात को आई भयानक आफत और सोता रह गया परिवार: आखिर प्रतापगढ़ में उस रात मलबे के नीचे क्या-क्या दफन हो गया?

संवाद 24 उत्तर प्रदेश। प्रतापगढ़ जिले से एक अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात करीब तीन बजे जब पूरा शहर गहरी नींद में सोया हुआ था, तभी अचानक एक जर्जर मकान भरभराकर ढह गया। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के छह लोगों की मलबे के नीचे दबकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि परिवार का एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है। यह दिल दहला देने वाली घटना नगर कोतवाली क्षेत्र के महुली वार्ड की है। हादसे के वक्त पूरा परिवार घर के भीतर सो रहा था। अचानक आए तेज धमाके और मकान की छत गिरने से किसी को भी संभलने का मौका तक नहीं मिला। पलक झपकते ही हंसता-खेलता परिवार काल के क्रूर गाल में समा गया।

मलबे में तब्दील हुई जिंदगी: जानिए कौन-कौन हुए हादसे के शिकार
हादसे की सूचना मिलते ही इलाके में हाहाकार मच गया। स्थानीय पड़ोसियों ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि आसपास के लोग भी सहम गए। मलबे के ढेर में दबे लोगों को बचाने के लिए चीख-पुकार मच गई।
इस भयावह त्रासदी में जान गंवाने वालों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:
प्रमोद श्रीवास्तव (उम्र 60 वर्ष) – गृहस्वामी
रीता श्रीवास्तव (उम्र 55 वर्ष) – प्रमोद श्रीवास्तव की पत्नी
नितिन श्रीवास्तव (उम्र 25 वर्ष) – प्रमोद श्रीवास्तव के पुत्र
माधुरी श्रीवास्तव (उम्र 23 वर्ष) – परिवार की छोटी बहू
माधव (उम्र 2 वर्ष) – माधुरी का दो वर्षीय मासूम बेटा
अद्विक (उम्र 4 माह) – माधुरी का चार महीने
वहीं, इस दर्दनाक घटना में परिवार का एक अन्य सदस्य, अमन श्रीवास्तव, बेहद गंभीर रूप से घायल हुआ है। अमन को मलबे से बाहर निकालकर तत्काल नजदीकी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

दो घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन: मलबे में अपनों को तलाशती रही पुलिस और जनता
घटना की जानकारी मिलते ही नगर कोतवाली पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे। महुली वार्ड के स्थानीय नागरिक भी तुरंत राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। कंक्रीट और ईंटों के भारी मलबे के नीचे दबे लोगों को बाहर निकालने के लिए लगभग दो घंटे तक लगातार राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। जेसीबी मशीन और स्थानीय लोगों की मदद से मलबे को एक-एक कर हटाया गया। एक-एक करके जब परिजनों के शव बाहर निकाले गए, तो मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। महज चार महीने के मासूम अद्विक और दो साल के माधव के बेजान शरीरों को देखकर पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
अस्पताल पहुंचाए जाने पर डॉक्टरों की टीम ने छह सदस्यों को मृत घोषित कर दिया, जबकि अमन का आपातकालीन वार्ड में गहन इलाज जारी है।

लगातार हो रही बारिश और जर्जर निर्माण बना हादसे की वजह
शुरुआती जांच और स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में रुक-रुक कर हो रही भारी बारिश के कारण पुराने और जर्जर हो चुके इस मकान की दीवारें और छत पूरी तरह से नमी सोख चुकी थीं। रात में अचानक छत का भारी-भरकम हिस्सा नीचे आ गिरा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शहर में मौजूद पुराने और जर्जर भवनों का सर्वे कराया जाएगा ताकि मानसून के इस मौसम में दोबारा ऐसी किसी अनहोनी को होने से रोका जा सके।

क्षेत्र में छाया मातम, सांत्वना देने पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी
इस हृदयविदारक घटना के बाद महुली वार्ड और आसपास के इलाकों में सन्नाटा पसरा हुआ है। पड़ोसी और रिश्तेदार स्तब्ध हैं कि कुछ ही घंटों पहले तक जिस घर में हंसी-खुशी का माहौल था, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और बिखरा हुआ मलबा ही शेष रह गया है। वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जायजा लिया है और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। घायल अमन के समुचित और बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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