एक तरफ कड़ा कानून, दूसरी तरफ इस्तीफे की मांग; जानिए कैसे खत्म हुआ सोनम वांगचुक का 27 दिनों का उपवास

संवाद 24 नई दिल्ली। देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों और लाखों युवाओं की चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने एक कड़ा व नीतिगत कदम उठाने का स्पष्ट संकेत दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति की समीक्षा करते हुए यह साफ कर दिया है कि युवाओं का भविष्य और परीक्षाओं की शुचिता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार ने घोषणा की है कि पेपर लीक जैसी धांधलियों पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए एक बेहद सख्त कानून लाया जा रहा है, जिसे संसद के वर्तमान सत्र में ही पारित कराने की तैयारी है। इसके अलावा मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने का भी निर्णय लिया गया है।

सरकार की सख्त नीति: युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ मंजूर नहीं
प्रशासनिक स्तर पर सरकार का रुख बेहद कड़ा नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री ने देश के छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि परीक्षाएं युवाओं के सालों की कड़ी मेहनत और उम्मीदों का प्रतीक होती हैं। हाल के दिनों में कम समय के भीतर नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं का सफल संचालन और पारदर्शी परिणाम जारी करने का हवाला देते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुधारों की यह प्रक्रिया यहीं नहीं रुकेगी। सरकार की मंशा है कि परीक्षा प्रणाली में धांधली करने वाले दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए और कानूनी पेचीदगियों का फायदा उठाकर कोई अपराधी बच न सके। इसी दिशा में फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन और जांच एजेंसियों को अतिरिक्त अधिकार दिए जा रहे हैं। साथ ही, शिक्षा और परीक्षा मंत्रालयों में प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल कर अनुभवी अधिकारियों की तैनाती की गई है ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

सोनम वांगचुक ने तोड़ा 27 दिनों का अनशन, केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में पिया जूस
सरकार द्वारा उठाए जा रहे इन सुधारात्मक कदमों और दिए गए आश्वासनों के बीच गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 27 दिनों से जारी अनशन समाप्त कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में उन्होंने जूस पीकर अपना उपवास तोड़ा। अनशन समाप्त करते हुए वांगचुक ने कहा कि देश में शांति बनाए रखना और लोकतांत्रिक ढांचे के तहत अपनी बात सरकार तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों को उठाने वाले युवाओं और छात्रों पर कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

विपक्ष और सीजेपी का रुख: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े
एक तरफ जहाँ सरकार कड़े कानून और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से भरोसा बहाल करने का प्रयास कर रही है, वहीं विरोध का नेतृत्व कर रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) अपने रुख पर कायम है। पार्टी का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उनका मानना है कि केवल नए कानून बना देने से पुरानी व्यवस्था की कमियां दूर नहीं होंगी, इसलिए वे देशभर में प्रदर्शन जारी रखेंगे।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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