
संवाद 24 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के युवाओं और पूर्व अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में यह आधिकारिक जानकारी साझा की है कि पूर्व अग्निवीरों को अब केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और असम राइफल्स में कॉन्स्टेबल (जनरल ड्यूटी) तथा राइफलमैन के पदों पर पचास प्रतिशत का सीधा आरक्षण दिया जाएगा। सरकार का यह बड़ा कदम उन युवाओं के लिए एक नई उम्मीद और करियर का बेहतरीन अवसर लेकर आया है जो चार साल की सेना सेवा पूरी करने के बाद देश की रक्षा में अपनी भूमिका जारी रखना चाहते हैं।
उम्र सीमा में विशेष राहत और नई श्रेणी का सृजन
संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस फैसले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने इन विशेष पदों के लिए ‘पूर्व-अग्निवीर’ नाम से एक नई भर्ती श्रेणी का गठन किया है। इस नई व्यवस्था के तहत हर साल निकलने वाली कुल रिक्तियों में से पचास प्रतिशत सीटें पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित रखी जाएंगी। इसके अलावा आवेदकों को तय अधिकतम आयु सीमा में तीन साल की सीधी छूट दी जाएगी। वहीं, अग्निवीरों के सबसे पहले बैच में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए सरकार ने और अधिक संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें निर्धारित ऊपरी आयु सीमा में पांच साल की अतिरिक्त छूट देने का फैसला किया है।
शारीरिक परीक्षा से छूट और भर्ती प्रक्रिया में बड़ी आसानी
केवल आरक्षण और आयु सीमा में राहत ही नहीं, बल्कि गृह मंत्रालय ने पूर्व अग्निवीरों के चयन की प्रक्रिया को भी बेहद आसान और सुलभ बना दिया है। गृह राज्य मंत्री के अनुसार, सीएपीएफ और असम राइफल्स में जनरल ड्यूटी कॉन्स्टेबल तथा राइफलमैन पदों के लिए आवेदन करने वाले पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) और फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) से पूरी तरह मुक्त रखा जाएगा। इसके साथ ही उन्हें लिखित परीक्षा में भी कई अहम रियायतें प्रदान की जाएंगी। चूंकि अग्निवीर सेना में चार साल का कड़ा शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण पहले ही पूरा कर चुके होते हैं, इसलिए उन्हें दोबारा शारीरिक दक्षता परीक्षा से नहीं गुजरना पड़ेगा।
गृह मंत्रालय ने बनाया ‘पूर्व-अग्निवीर विंग’ और बदले भर्ती नियम
पूर्व अग्निवीरों के आगे के करियर, पदोन्नति और उनके प्रशासनिक तालमेल को बेहतर तरीके से संभालने के लिए गृह मंत्रालय के अंतर्गत एक समर्पित ‘पूर्व-अग्निवीर विंग’ का भी गठन कर दिया गया है। इस दूरगामी नीति को लागू करने के लिए गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) भर्ती नियम 2015 में संशोधन कर पूर्व अग्निवीरों का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। इसी प्रकार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) समेत अन्य अर्धसैनिक बलों ने भी अपने भर्ती नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे हर साल सीधी भर्ती की आधी सीटें पूर्व अग्निवीरों के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।
युवाओं के भविष्य और देश की सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
केंद्र सरकार के इस बहुप्रतीक्षित फैसले को देश के युवाओं और रक्षा विशेषज्ञों द्वारा एक अत्यंत सराहनीय कदम माना जा रहा है। अग्निपथ योजना को लेकर शुरू से ही युवाओं के मन में चार साल के कार्यकाल के बाद रोजगार को लेकर जो चिंताएं थीं, यह फैसला उन सभी आशंकाओं को पूरी तरह खत्म करता है। अर्धसैनिक बलों को पहले से प्रशिक्षित, अनुशासित और देशभक्ति के जज्बे से लबरेज युवा सैनिक मिलेंगे, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की चौकसी और अधिक मजबूत होगी।






