
संवाद 24 गुरुग्राम। देश की सियासत और सामाजिक आंदोलनों के बीच मंगलवार की देर रात एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम स्थित प्रतिष्ठित मेदांता अस्पताल में अचानक गहमागहमी बढ़ गई, जब केंद्र सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अस्पताल परिसर पहुंचे।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद बदला ठिकाना
यह पूरा मामला दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद गरमाया, जिसमें अदालत ने सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें किसी उच्चस्तरीय निजी चिकित्सा संस्थान में स्थानांतरित (Shift) करने का निर्देश दिया था। इससे पहले सोनम वांगचुक को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रखा गया था। हालांकि, चिकित्सा सुविधाओं और परिजनों व समर्थकों की मांग पर दिल्ली हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मंगलवार शाम लगभग 7:30 बजे उन्हें कड़े सुरक्षा घेरे में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल लाया गया। मेदांता पहुंचते ही डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण शुरू किया। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, वांगचुक को तुरंत क्रिटिकल केयर विभाग के ICU-8 में भर्ती कराया गया, जहां वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. सुशीला कटारिया की सीधी देखरेख में उनका इलाज और ऑब्जर्वेशन शुरू किया गया।
आधी रात को ICU-8 में पहुंचे जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह
जैसे ही सोनम वांगचुक के मेदांता अस्पताल में भर्ती होने की खबर पुख्ता हुई, देर रात लगभग 11 बजे के आसपास केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह अस्पताल पहुंचे।
दोनों नेताओं ने आईसीयू कक्ष के भीतर जाकर सोनम वांगचुक के बेड के पास कुछ समय बिताया, उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और डॉक्टरों की टीम से वांगचुक के मेडिकल बुलेटिन पर विस्तार से चर्चा की।
स्वास्थ्य स्थिति का जायजा: केंद्रीय मंत्रियों ने डॉ. सुशीला कटारिया और अस्पताल प्रशासन से पूछा कि वांगचुक की सेहत में सुधार की क्या स्थिति है और उन्हें किस तरह का चिकित्सा उपचार दिया जा रहा है।
बेहतर सुविधाओं का आश्वासन: सूत्रों के अनुसार, जेपी नड्डा ने डॉक्टरों को निर्देश दिया कि वांगचुक की देखरेख में किसी भी तरह की कमी न छोड़ी जाए और उन्हें हर संभव बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
विरोध प्रदर्शन और राजधानी का गरमाता माहौल
सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और उनकी मांगों को लेकर राजधानी दिल्ली समेत पड़ोसी राज्यों में भी राजनीतिक तापमान चरम पर है। पिछले कुछ दिनों से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और पर्यावरण संरक्षण जैसी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे।
जंतर-मंतर से लेकर संसद मार्ग तक कई संगठनों ने वांगचुक के समर्थन में नारेबाजी की। दिल्ली पुलिस को न केवल सड़कों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, बल्कि सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक अफवाहों पर भी लगातार नजर रखनी पड़ी। इस बीच, रामगढ़ और भिवानी जैसे इलाकों में भी छात्र संगठनों और यूनियनों (जैसे CITU) द्वारा सोनम वांगचुक के समर्थन में उपवास और धरना-प्रदर्शन किए जाने की खबरें आई हैं।
अदालत की सख्त नजर और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर केंद्र सरकार और अस्पताल प्रशासन से विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट तलब की है। अदालत का स्पष्ट कहना है कि किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों और उसके स्वास्थ्य की सुरक्षा प्राथमिक जिम्मेदारी है। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से आश्वासन दिया गया कि वांगचुक को सर्वोच्च स्तर की चिकित्सा देखभाल दी जा रही है। फ़िलहाल, मेदांता अस्पताल की ओर से सोनम वांगचुक का अगला हेल्थ बुलेटिन जारी होने का इंतजार किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक जांचों के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।






