
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और हरिद्वार, बिजनौर तथा नरौरा बैराज से छोड़े गए पानी का असर अब फर्रुखाबाद में साफ दिखाई देने लगा है। गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और बुधवार सुबह 8:30 बजे यह 136.10 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी (खतरे) के निशान से महज 50 सेंटीमीटर नीचे है। सिंचाई विभाग और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं तथा तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
ऊपरी बांधों से लगातार छोड़ा जा रहा पानी, बढ़ सकता है जलस्तर
जल संसाधन विभाग के अनुसार मंगलवार को हरिद्वार से 43,354 क्यूसेक, बिजनौर से 52,709 क्यूसेक और नरौरा बांध से 68,957 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। वहीं रामगंगा नदी में खो-हरेली (रामनगर) बैराज से भी 4,645 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहाड़ों पर बारिश का सिलसिला जारी रहा और ऊपरी बांधों से इसी तरह पानी छोड़ा जाता रहा तो आने वाले दिनों में गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है।
पांचाल घाट डूबा, श्रद्धालुओं के पक्के घाट भी जलमग्न
बढ़ते जलस्तर का सबसे अधिक असर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल पांचाल घाट पर दिखाई दे रहा है। पर्यटन विभाग द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बनाए गए पक्के स्नान घाट पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। घाटों तक पहुंच सीमित होने लगी है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
तटीय इलाकों में बढ़ी बेचैनी, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे पांडा
गंगा का पानी उत्तरी बंधा की ओर लगातार बढ़ रहा है। जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए घाटों पर रहने वाले पांडा और स्थानीय लोगों ने अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। वहीं शमसाबाद, गंगापार और कटरी क्षेत्र के कई गांवों में भी लोग संभावित बाढ़ की आशंका को लेकर सतर्क हैं।
प्रशासन की अपील- अफवाहों से बचें, सतर्क रहें
प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सिंचाई विभाग जलस्तर का नियमित आकलन कर रहा है और जरूरत पड़ने पर तटीय क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा एवं राहत व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से नदी के किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।






