
संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। आगामी 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के अत्यंत महत्वपूर्ण मानसून सत्र को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है। सत्र के दौरान विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देने और अपने महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए सत्तारूढ़ खेमे ने अपनी चाणक्य नीति तैयार कर ली है। इसी सिलसिले में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सरकारी आवास पर आज केंद्रीय मंत्रियों और शीर्ष नेताओं की एक बेहद अहम और उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद के भीतर विपक्ष की हर संभावित घेराबंदी को नाकाम करने की एक अभेद्य रणनीति तैयार करना था।
सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक और विधायी रूपरेखा
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संसद का यह मानसून सत्र 20 जुलाई से प्रारंभ होकर 13 अगस्त तक संचालित होगा। इस अवधि के दौरान राष्ट्रीय महत्व के कई गंभीर विषयों पर व्यापक चर्चा के साथ-साथ कई आवश्यक विधायी कार्य पूरे किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। संसद की औपचारिक शुरुआत से ठीक एक दिन पहले, यानी 19 जुलाई को सरकार की ओर से एक पारंपरिक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है। इस बैठक में सरकार संसद के पटल पर रखे जाने वाले अपने सभी प्रमुख विधेयकों और एजेंडे की जानकारी विपक्षी दलों को देगी, जबकि विपक्षी दल भी देश से जुड़े उन ज्वलंत मुद्दों को सामने रखेंगे जिन पर वे सदन में व्यापक बहस की मांग कर रहे हैं।
इस ऐतिहासिक और विवादित विधेयक पर टिकीं सबकी नजरें
इस आगामी मानसून सत्र में सरकार कई अत्यंत महत्वपूर्ण और युगांतकारी विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक’ को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में यह विधेयक भारी बहस का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि इसमें एक बेहद कड़ा और अभूतपूर्व प्रावधान शामिल किया गया है। नए प्रविधानों के अनुसार, यदि देश का कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या राज्य स्तर का मंत्री किसी भी गंभीर आपराधिक मामले में 30 दिनों से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत (जेल) में रहता है, तो उसका पद स्वतः ही समाप्त माना जाएगा।
इस समय इस संवेदनशील विधेयक की बारीकी से जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) आगामी 17 जुलाई को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने जा रही है। इस विधेयक के कानूनी रूप लेते ही देश की राजनीति का पूरा परिदृश्य बदल सकता है, यही वजह है कि सरकार और विपक्ष दोनों के लिए यह सत्र करो या मरो की स्थिति जैसा बन गया है।
नीट-यूजी से लेकर विशेषाधिकार हनन तक: विपक्ष की भारी घेराबंदी
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष सरकार को हर मोर्चे पर घेरने के लिए तरकश में तीखे तीर सजाए बैठा है। विपक्ष के एजेंडे में सबसे बड़ा मुद्दा हाल ही में हुआ ‘नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामला’ है, जिस पर देश के लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। विपक्ष इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्रालय को कटघरे में खड़ा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके अतिरिक्त, हालिया सैन्य घटनाक्रम और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दिए गए बयानों पर भी सदन में भारी हंगामा होने के पूरे आसार हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस मसले पर रक्षा मंत्री के खिलाफ बयानों में विसंगति का आरोप लगाते हुए संसद में विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दे रखा है। विपक्ष इन सभी राष्ट्रीय और रणनीतिक मुद्दों पर सरकार से सीधे और तीखे सवाल पूछने की तैयारी कर चुका है, जिससे सदन में जबरदस्त टकराव और हंगामे की स्थिति बनने की पूरी आशंका है।
रक्षा मंत्री के आवास पर सरकार का सुरक्षा कवच
विपक्ष की इसी आक्रामक रणनीति की धार को कुंद करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर सरकार के वरिष्ठ रणनीतिकारों ने घंटों मंथन किया। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस बात पर सर्वसम्मति बनी कि सरकार जनहित और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मुद्दे पर सदन के भीतर खुली चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को बिना ठोस तथ्यों के सदन की कार्यवाही बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने तय किया है कि विपक्ष के हर आरोप का जवाब पूरी तार्किकता, आंकड़ों और विधायी नियमों के तहत दिया जाएगा, ताकि देश के सामने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा जा सके।






