
संवाद 24 नई दिल्ली। मानसून की रफ्तार ने देश के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। पिछले 24 घंटों में आसमान से बरसी राहत अब आफत में तब्दील हो चुकी है। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात तक कुदरत का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के 17 राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस मानसूनी आफत ने अब तक कई मासूमों सहित दर्जनों लोगों की जिंदगी छीन ली है, जबकि सैकड़ों शहरों और गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया है।
दिल्ली-एनसीआर में थमी जिंदगी: वीआईपी इलाकों में डूबी गाड़ियां
देश के सबसे हाई-टेक माने जाने वाले दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की तैयारियों की इस बारिश ने पूरी तरह पोल खोल कर रख दी है। गाजियाबाद, गुरुग्राम, नोएडा और फरीदाबाद में गुरुवार सुबह से शुरू हुई मूसलाधार बारिश के बाद सड़कें समंदर बन गईं। गाजियाबाद के साहिबाबाद (वसुंधरा सेक्टर-13) में उस वक्त हड़कंप मच गया जब मुख्य सड़क करीब 15 फीट तक नीचे धंस गई और एक चलती कार सीधे उस गहरे गड्ढे में समा गई। जलभराव का आलम यह था कि दिल्ली के भोगल अंडरपास में पानी भरने से एक लग्जरी बीएमडब्ल्यू कार बीच मजधार में फंस गई। विभिन्न सोसायटियों के बेसमेंट में पानी भरने से अकेले एनसीआर में 200 से अधिक गाड़ियां जलमग्न होकर खराब हो चुकी हैं। दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश और रोहिणी जैसे व्यस्त इलाकों में भारी-भरकम पेड़ों के उखड़ने से कई वाहन मलबे में दब गए, जिससे घंटों तक ट्रैफिक रेंगता रहा।
उत्तर प्रदेश में हाहाकार: 24 घंटे में 19 मौतें, 60 जिलों पर मंडराया खतरा
सबसे दर्दनाक तस्वीरें उत्तर प्रदेश से सामने आ रही हैं, जहां पिछले 24 घंटों के भीतर बारिश, जलभराव और आकाशीय बिजली (वज्रपात) की चपेट में आने से 19 लोगों की अकाल मौत हो गई। गाजियाबाद में अपने घर के बाहर जमा पानी में डूबने से एक 3 वर्षीय मासूम बच्ची और खुले नाले में बहने से एक 7 वर्षीय बच्चे की मौत ने सबको झकझोर दिया है। वहीं, इंदिरापुरम के ज्ञानखंड में एक पार्क के पास लगे ट्रांसफार्मर से पानी में करंट उतरने के कारण सोसाइटी के चौकीदार की जान चली गई। बुलंदशहर के मुंडाखेड़ा गांव में एक जर्जर मकान की दीवार ढह जाने से मलबे में दबकर पति-पत्नी और उनके बच्चे समेत एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। पूर्वांचल के चार अलग-अलग जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से 7 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
मौसम विभाग के वरिष्ठ विज्ञानी अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से उठा एक बेहद सक्रिय वेदर सिस्टम इस समय मध्य प्रदेश के करीब पहुंच चुका है, जिसके चलते उत्तर प्रदेश में पूरब से लेकर पश्चिम तक रिकॉर्डतोड़ बारिश हो रही है। पिछले 24 घंटों में बिजनौर में सबसे ज्यादा 306 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक लखनऊ समेत उत्तर प्रदेश के 60 से अधिक जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर और मुजफ्फरनगर के दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य कस्बों से टूट गया है, वहीं गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है।
पहाड़ों में लैंडस्लाइड और गुजरात-महाराष्ट्र में बाढ़ जैसे हालात
मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी राज्यों में भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और लगातार हो रहे भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के कारण 84 से अधिक मुख्य और संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो चुके हैं। चारधाम यात्रा का रूट भी कई जगहों पर आंशिक रूप से बाधित हुआ है। नैनीताल झील का जलस्तर अचानक बढ़ने के कारण वहां नावों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। एहतियात के तौर पर राज्य के कई संवेदनशील जिलों में स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। उधर हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में बाढ़ के तेज बहाव में एक 100 फीट लंबा लोहे का बेली ब्रिज ताश के पत्तों की तरह बह गया।
पश्चिम भारत की बात करें तो गुजरात और महाराष्ट्र में मानसूनी बारिश ने भारी तबाही मचाई है। गुजरात के सूरत में बारिश से जुड़े हादसों में 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को खुद हालात का जायजा लेने के लिए जमीन पर उतरना पड़ा। निचले इलाकों से करीब 3,900 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं महाराष्ट्र के पुणे में एक इमारत का मलबा गिरने से एनडीआरएफ की टीम ने शव बरामद किए हैं और अब भी कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। रायगढ़ जिले में आई भीषण बाढ़ के दौरान पाताल गंगा नदी में एक गैस बॉटलिंग प्लांट से बहकर आए करीब 3,000 एलपीजी सिलेंडर नदी की लहरों पर तैरते नजर आए, जिसे देखकर स्थानीय लोग सहम गए। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 48 से 72 घंटों तक मानसून का यह उग्र रूप जारी रहेगा, इसलिए लोग बहुत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें और जलभराव वाले इलाकों या बिजली के खंभों से दूरी बनाकर रखें।






