
संवाद 24 नई दिल्ली। आधुनिक युद्ध के बदलते तौर-तरीकों और तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए भारतीय सेना खुद को भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह से तैयार कर रही है। हाल के दिनों में हुए वैश्विक संघर्षों और देश की सीमाओं पर उपजे हालातों से सबक लेते हुए सेना अब अपनी हवाई निगरानी और तकनीकी मारक क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में भारतीय सेना द्वारा एक अत्यंत विशेष ‘बाज बटालियन’ (Baaz Battalion) का गठन किया जा रहा है। यह विशेष बटालियन मुख्य रूप से ड्रोन युद्ध (Drone Warfare) और उन्नत हवाई निगरानी (Aerial Surveillance) के मोर्चे पर काम करेगी, जिससे दुश्मन की हर हरकत पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा सकेगी.
भविष्य के युद्धों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी ‘बाज’
सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ‘बाज बटालियन’ का मुख्य उद्देश्य सीमाओं पर चौतरफा निगरानी रखना, संवेदनशील क्षेत्रों में ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूती देना और फ्रंटलाइन यूनिट्स (अग्रिम चौकियों) व इंटेलिजेंस सिस्टम के बीच सीधा और सटीक तालमेल स्थापित करना है। यह अनूठी पहल भारतीय सेना को और अधिक तकनीक-सक्षम, चुस्त और भविष्य-उन्मुख (Future-oriented) बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होने वाली है।
रिमोटली पाइलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) का मिलेगा सहारा
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस ऐतिहासिक कदम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया कि ये नई ‘बाज बटालियनें’ मौजूदा रिमोटली पाइलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) फ्लाइट्स की तर्ज पर आधारित होंगी। ये आरपीए वास्तव में अत्याधुनिक मानव रहित हवाई वाहन (UAV) या ड्रोन हैं, जिन्हें सुरक्षित ठिकानों से बैठकर रिमोट के जरिए संचालित किया जाता है। इस विशेष विंग के तहत सेना में विशेष रूप से प्रशिक्षित जवानों का एक बड़ा पूल तैयार किया जा रहा है, जो केवल आरपीए सिस्टम को ऑपरेट करने, डेटा कलेक्ट करने और किसी भी आपात स्थिति में उसे मैनेज करने में माहिर होंगे। इसका सीधा फायदा युद्धक्षेत्र में निरंतर नजर (ISR – इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही क्षमताओं) को बढ़ाने में मिलेगा, ताकि सेना जरूरत पड़ने पर मिनटों में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दे सके। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह विशेष बटालियन सीधे ‘आर्मी एविएशन कोर’ के अंतर्गत रहकर अपनी सेवाएं देगी।
वैश्विक संघर्षों और ऑपरेशन्स से लिया गया बड़ा सबक
भारतीय सेना का यह दूरगामी फैसला हालिया वैश्विक एवं क्षेत्रीय रणनीतिक घटनाओं से प्रेरित माना जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध हो, चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय से जारी तनाव हो, या फिर पाकिस्तान के खिलाफ चलाया गया सेना का ‘ऑपरेशन सिंदूर’—इन सभी मामलों में ड्रोन और हवाई तकनीक की भूमिका बेहद निर्णायक और विनाशकारी साबित हुई है। सेना के रणनीतिकारों का मानना है कि अब पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ तकनीकी रूप से उन्नत ड्रोन तकनीक से ही युद्ध जीते जा सकते हैं। यही कारण है कि भारतीय सेना अब अपनी पूरी ताकत के साथ ड्रोन इकोसिस्टम को मजबूत करने में जुट गई है।
ड्रोन की संख्या में हुआ है रिकॉर्ड इजाफा, घातक हथियार खरीदने की तैयारी
तकनीकी आत्मनिर्भरता और ताकत की बानगी इसी बात से समझी जा सकती है कि सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी के अनुसार, महज दो साल पहले तक भारतीय सेना के पास गिने-चुने कुछ सौ ड्रोन ही मौजूद थे। मगर आज सेना के बेड़े में 50,000 से भी अधिक आधुनिक ड्रोन सक्रिय रूप से तैनात हैं। इतना ही नहीं, सेना का अनुमान है कि आने वाले अगले दो से तीन वर्षों के भीतर देश की यह आसमानी ताकत दोगुनी यानी 1 लाख से भी ऊपर पहुंच सकती है। इसके साथ ही, अग्रिम मोर्चों को अभेद्य बनाने के लिए सेना लगभग 2000 करोड़ रुपये की बड़ी लागत से तकरीबन 850 बेहद घातक ‘कॉमिकेज ड्रोन’ (Kamikaze Drones) खरीदने की प्रक्रिया पर भी तेजी से काम कर रही है। ये वो आत्मघाती ड्रोन होते हैं जो सीधे दुश्मन के ठिकाने से टकराकर उसे पूरी तरह नेस्तनाबूद कर देते हैं। ‘बाज बटालियन’ के रूप में उठने वाला यह नया कदम भारतीय सीमाओं की सुरक्षा को अचूक और अजेय बनाने जा रहा है।






