
भारत-नेपाल सीमा से होकर नेपाल जाने वाले भारतीय वाहन चालकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लागू कर दिया गया है। नेपाल सरकार ने सोमवार से टिंटेड ग्लास (काले शीशे) लगे वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान शुरू कर दिया है। नए नियमों के तहत काले शीशे लगी भारतीय गाड़ियों को नेपाल में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। सीमा पर ही वाहन चालकों को टिंटेड फिल्म हटानी होगी, अन्यथा उन्हें प्रवेश से रोका जा सकता है। नेपाल के भीतर ऐसे वाहन पकड़े जाने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
सरकार ने खुद पेश की मिसाल, गृह मंत्री की गाड़ी से हटवाए गए काले शीशे
नेपाल सरकार ने इस अभियान की शुरुआत प्रतीकात्मक रूप से अपने ही सरकारी वाहनों से की। गृह मंत्री सुधन गुरुंग और गृह सचिव राजकुमार श्रेष्ठ के वाहनों से टिंटेड ग्लास हटाए गए। गृह मंत्री स्वयं ट्रैफिक पुलिस कार्यालय पहुंचे और अपनी गाड़ियों से काले शीशे हटवाकर आम नागरिकों से भी यातायात नियमों का पालन करने की अपील की। इस कदम को सरकार की ‘पहले खुद, फिर जनता’ की नीति के रूप में देखा जा रहा है।
तस्करी और अपराध पर रोक के लिए उठाया गया कदम
नेपाल ट्रैफिक पुलिस के अनुसार टिंटेड ग्लास वाले वाहनों का इस्तेमाल छोटे हथियारों, मादक पदार्थों, सोने की तस्करी तथा अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा रहा था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पारदर्शी शीशों से वाहनों की जांच अधिक प्रभावी होगी और सीमा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
भारतीय वाहन चालकों के लिए एडवाइजरी
सीमा से जुड़े अधिकारियों ने भारत से नेपाल जाने वाले वाहन चालकों को सलाह दी है कि यात्रा शुरू करने से पहले अपने वाहनों से टिंटेड ग्लास या काली फिल्म हटवा लें। ऐसा नहीं करने पर सीमा पर समय की बर्बादी, प्रवेश में देरी या कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से पर्यटन, व्यापार और धार्मिक यात्रा पर जाने वाले लोगों को इस नए नियम का पालन करने की सलाह दी गई है।
सीमा पार आवागमन पर पड़ सकता है असर
उत्तर प्रदेश के महराजगंज सहित भारत-नेपाल सीमा से प्रतिदिन बड़ी संख्या में निजी और व्यावसायिक वाहन नेपाल में प्रवेश करते हैं। ऐसे में नेपाल सरकार के इस निर्णय का सीधा प्रभाव सीमा पार यात्रा करने वाले भारतीय वाहन चालकों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों का पालन करने से यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा, जबकि सीमा पर जांच व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सख्त रहने की संभावना है।






