
संवाद 24 नई दिल्ली। केंद्र सरकार प्रशासनिक सुधारों और सुशासन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाना है। साथ ही ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से जुड़े सुधारों की प्रगति का आकलन भी किया जाएगा।
विकसित भारत के लक्ष्य पर रहेगा विशेष जोर
सरकार वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर लगातार काम कर रही है। इसी दृष्टि से यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री विभिन्न मंत्रालयों द्वारा किए गए सुधारों की समीक्षा करेंगे और भविष्य के लिए नई कार्ययोजना पर भी चर्चा करेंगे। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निवेश को बढ़ावा देने और आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया जाएगा।
हर सचिव को मिलेगा सीमित समय
सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान प्रत्येक सचिव को अपनी बात रखने के लिए सीमित समय दिया जाएगा। उनसे अपेक्षा की गई है कि वे अपने मंत्रालय में अब तक किए गए सुधारों, भविष्य की योजनाओं और उन सुझावों को साझा करें जिनसे शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। बैठक का उद्देश्य लंबी प्रस्तुतियों के बजाय ठोस और परिणामोन्मुख सुझाव प्राप्त करना है।
लालफीताशाही कम करने पर रहेगा फोकस
सरकार पिछले कुछ समय से नियमों को सरल बनाने और अनावश्यक प्रक्रियाओं को समाप्त करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इस बैठक में भी गैर-जरूरी नियमों, अनुमतियों और अनुपालनों को कम करने के उपायों पर चर्चा होने की संभावना है। इससे उद्योगों को कारोबार करने में आसानी मिलेगी और सरकारी सेवाओं की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।
नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की तैयारी
बैठक में केवल उद्योग और निवेश से जुड़े मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों के दैनिक जीवन को आसान बनाने वाले सुधारों पर भी विचार किया जाएगा। डिजिटल सेवाओं का विस्तार, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करना और विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल रह सकते हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बैठकें केवल समीक्षा तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि अधिकारियों के बीच जवाबदेही और बेहतर समन्वय की भावना भी विकसित करती हैं। सरकार चाहती है कि प्रत्येक मंत्रालय तय समयसीमा के भीतर सुधार कार्यक्रमों को लागू करे और उनका सीधा लाभ नागरिकों तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से समय-समय पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों का आयोजन किया जाता है।
आगे की रणनीति भी होगी तय
बैठक में भविष्य की प्रशासनिक रणनीति, आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने, निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने तथा आधुनिक और भरोसेमंद शासन व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक से निकलने वाले सुझाव आने वाले समय में कई नई नीतियों और सुधारात्मक कदमों का आधार बन सकते हैं।






