भगवान राम के कथित अपमान पर बांग्लादेश में बढ़ा आक्रोश, पहले मशाल जुलूस फिर आज बड़े प्रदर्शन का आह्वान

संवाद 24 नई दिल्ली। बांग्लादेश में भगवान राम की प्रतिमा और चित्र के कथित अपमान को लेकर हिंदू समुदाय से जुड़े छात्रों और विभिन्न संगठनों के बीच नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। इस मुद्दे पर बीते दिनों ढाका विश्वविद्यालय में छात्रों ने मशाल जुलूस निकालकर विरोध दर्ज कराया था, वहीं अब शुक्रवार को राजधानी ढाका के शाहबाग क्षेत्र में बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि यदि दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

गाइबांधा की घटना से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत उत्तरी बांग्लादेश के गाइबांधा जिले से जुड़ी उस घटना के बाद हुई, जिसमें भगवान राम से संबंधित धार्मिक प्रतीक के कथित अपमान के आरोप सामने आए। इसके साथ ही पलाशबाड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित विशाल राम प्रतिमा परियोजना को लेकर भी तनाव की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं ने हिंदू समुदाय के बीच चिंता और असंतोष को बढ़ा दिया, जिसके बाद छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

ढाका विश्वविद्यालय में हुआ पहला बड़ा विरोध
मामले के विरोध में 15 जून को ढाका विश्वविद्यालय में छात्रों ने मशाल जुलूस निकाला और सभा आयोजित की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। छात्रों ने दोषियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। विरोध कार्यक्रम के बाद छात्रों ने शाहबाग की ओर मार्च भी किया और अपनी मांगों को दोहराया।

सरकार को दिया गया था 72 घंटे का अल्टीमेटम
विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने सरकार को 72 घंटे का समय दिया था। उनका कहना था कि यदि निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो शुक्रवार को राजधानी में और बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। छात्र संगठनों का दावा है कि उन्हें अब तक अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जिसके चलते आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जा रहा है।

आज शाहबाग में जुटने की तैयारी
शुक्रवार को शाहबाग चौराहे पर बड़े छात्र प्रदर्शन की घोषणा की गई है। आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विरोध नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सम्मान से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी सामने लाने का प्रयास है। विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों के इस प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

कई संगठनों ने भी बढ़ाया समर्थन
छात्र समूहों के अलावा कई हिंदू संगठनों और सामाजिक मंचों ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई है। कुछ संगठनों ने अलग से मानव श्रृंखला, प्रेस वार्ता और विरोध कार्यक्रमों की घोषणा की है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों, प्रतिमाओं और आस्था से जुड़े प्रतीकों के सम्मान की रक्षा के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए।

धार्मिक सौहार्द बनाए रखने की अपील
हालांकि प्रदर्शनकारी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं, लेकिन साथ ही कई छात्र नेताओं ने धार्मिक सद्भाव बनाए रखने की भी अपील की है। उनका कहना है कि बांग्लादेश की सामाजिक एकता और शांति तभी मजबूत रह सकती है जब सभी समुदायों की धार्मिक भावनाओं का समान सम्मान किया जाए। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने का आग्रह किया है।

अब सबकी नजर आज के प्रदर्शन पर
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर बांग्लादेश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर बनी हुई है। एक ओर 15 जून का विरोध प्रदर्शन पहले ही हो चुका है, वहीं दूसरी ओर आज शाहबाग में प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन को इस आंदोलन के अगले महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या रहती है और आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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