
संवाद 24 हरियाण। साइबर सिटी गुरुग्राम में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में इस गिरोह के तार इजरायली सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं। पुलिस ने मामले में एक भारतीय महिला और एक कॉल सेंटर संचालक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह फर्जी कॉल सेंटर के जरिए देश-विदेश के लोगों को निवेश और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों से ठगी का शिकार बना रहा था।
फर्जी कॉल सेंटर से चल रहा था ठगी का खेल
पुलिस के अनुसार, आरोपी गुरुग्राम में कॉल सेंटर की आड़ में साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे। यहां से लोगों को फोन और ऑनलाइन माध्यमों से संपर्क किया जाता था। उन्हें कभी निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया जाता, तो कभी डराकर पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश की जाती थी।
इजरायली कनेक्शन ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
इस मामले में विदेशी कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस जांच और गंभीर हो गई है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि गिरफ्तार आरोपियों का इजरायल से जुड़े नेटवर्क से कितना सीधा संपर्क था और ठगी की रकम किन खातों या डिजिटल चैनलों के जरिए आगे भेजी जाती थी।
लैपटॉप, मोबाइल और दस्तावेज बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। इनसे गिरोह के बाकी सदस्यों, पैसों के लेनदेन और संभावित विदेशी ऑपरेटरों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था।
डिजिटल अरेस्ट और निवेश ठगी का जाल
पिछले कुछ समय में डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। ठग खुद को पुलिस, एजेंसी अधिकारी या वित्तीय सलाहकार बताकर लोगों को डराते या लालच देते हैं। इसके बाद पीड़ितों से बैंक ट्रांसफर, यूपीआई या अन्य माध्यमों से रकम ऐंठी जाती है।
गुरुग्राम पहले भी रहा है साइबर रैकेट का ठिकाना
गुरुग्राम में इससे पहले भी विदेशी लिंक वाले साइबर फ्रॉड नेटवर्क पकड़े जा चुके हैं। हाल ही में फिलीपींस और कंबोडिया से जुड़े साइबर रैकेट का भी खुलासा हुआ था, जिसमें तकनीकी उपकरणों और सिम बॉक्स का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने की बात सामने आई थी।
पुलिस की जांच जारी, और गिरफ्तारियां संभव
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल वॉलेट और विदेशी संपर्कों की जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि इस मामले में आगे और नाम सामने आ सकते हैं और गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है।
लोगों के लिए चेतावनी
किसी भी अनजान कॉल, निवेश ऑफर या डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकी पर भरोसा न करें। पुलिस या सरकारी एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी दिखाकर पैसे नहीं मांगती। ऐसे मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने में शिकायत करनी चाहिए।






