
संवाद 24 नई दिल्ली। अफ्रीकी देशों में इबोला के बढ़ते मामलों के बीच भारत सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने उच्चस्तरीय बैठक कर देश की तैयारियों की समीक्षा की और साफ किया कि भारत में अभी तक इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है।
एयरपोर्ट और सीमाओं पर निगरानी तेज
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, बंदरगाहों और भूमि सीमाओं पर स्क्रीनिंग और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर प्रभावित देशों से आने या वहां से होकर गुजरने वाले यात्रियों पर नजर रखी जा रही है।
राज्यों को अलर्ट रहने के निर्देश
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि संदिग्ध मामलों की पहचान, आइसोलेशन, जांच और उपचार की व्यवस्था पहले से तैयार रखी जाए। अस्पतालों में अलग वार्ड, प्रशिक्षित स्टाफ और जरूरी सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता पर जोर दिया गया है।
DGCA ने एयरलाइंस के लिए SOP जारी की
विमानन नियामक DGCA ने युगांडा और कांगो से जुड़े मार्गों पर उड़ान संचालित करने वाली एयरलाइंस के लिए विशेष SOP जारी की है। इसमें यात्रियों की स्वास्थ्य जांच, संदिग्ध मरीजों को अलग रखने और हेल्थ डिक्लेरेशन फॉर्म जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
कितना खतरनाक है इबोला?
इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकती है। बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त और रक्तस्राव जैसे लक्षण इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए सरकार का जोर घबराहट नहीं, बल्कि समय रहते पहचान और रोकथाम पर है।
भारत की रणनीति: सतर्कता, जांच और जागरूकता
केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी संभावित मामले को शुरुआती स्तर पर ही पहचानकर फैलाव रोका जाए। स्वास्थ्य एजेंसियों, एयरपोर्ट अधिकारियों, अस्पतालों और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई हो सके।
जनता के लिए सलाह
स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। प्रभावित देशों से लौटने वाले यात्रियों को अगर बुखार या अन्य लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।






