लखनऊ जिला कोर्ट के बाहर बुलडोजर एक्शन पर बवाल
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लखनऊ में रविवार को जिला अदालत परिसर के बाहर उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब नगर निगम और प्रशासन की टीम अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर लेकर पहुंची। कार्रवाई के दौरान वकीलों के चैंबर तोड़े जाने लगे, जिसके विरोध में अधिवक्ताओं ने जमकर हंगामा किया। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस और वकीलों के बीच धक्का-मुक्की, पथराव और लाठीचार्ज की नौबत आ गई। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद चला बुलडोजर
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जिला कोर्ट परिसर के बाहर किए गए अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने करीब 240 अवैध निर्माणों को चिह्नित किया था, जिनमें अधिकांश वकीलों के चैंबर और अस्थायी दुकानें शामिल थीं। रविवार सुबह करीब 9 बजे नगर निगम की टीम 10 बुलडोजर, 5 ट्रक और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू कर दी।
“36 साल से यही चैंबर है…”
कार्रवाई के दौरान कई अधिवक्ता भावुक हो उठे। एक वरिष्ठ वकील हाथ जोड़कर पुलिस और अधिकारियों से अपने चैंबर को न तोड़ने की अपील करते नजर आए। उन्होंने कहा कि पिछले 36 वर्षों से वही उनका कार्यस्थल है और यदि उसे तोड़ा गया तो वे जीवित नहीं रह पाएंगे। यह दृश्य मौके पर मौजूद लोगों को भावुक कर गया।
आत्महत्या की कोशिश से मचा हड़कंप
बुलडोजर कार्रवाई के बीच एक अधिवक्ता ने अपने चैंबर के अंदर खुद को बंद कर फांसी लगाने की कोशिश की। स्थिति गंभीर होती देख पुलिसकर्मियों ने बगल का हिस्सा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और विरोध और उग्र हो गया।
पुलिस और वकीलों के बीच टकराव
विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। कुछ वकीलों ने राम दरबार की तस्वीर लेकर प्रदर्शन किया, वहीं कुछ लोग सुंदरकांड और अखंड रामायण पाठ करते दिखाई दिए। पुलिस द्वारा रास्ता खाली कराने की कोशिश के दौरान तीखी बहस हुई और फिर हालात बेकाबू हो गए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, जबकि दूसरी ओर कुछ लोगों द्वारा पुलिस पर पथराव किए जाने की भी खबर सामने आई।
पुलिस पर भी लगे गंभीर आरोप
कई अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस और नगर निगम कर्मचारियों ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। कुछ वकीलों का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने लाठियां बरसाईं और ईंट-पत्थर भी फेंके। एक अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि अखंड रामायण पाठ कर रहे पंडित को भी लाठी मारी गई और धार्मिक ग्रंथ फेंक दिया गया, जिसके बाद आक्रोश और बढ़ गया।
कितने चैंबर टूटे, आंकड़ों पर विवाद
नगर निगम के मुताबिक स्वास्थ्य भवन की ओर बने 72 और निबंधन भवन की तरफ करीब 18 चैंबर हटाए गए हैं। हालांकि अधिवक्ताओं का दावा है कि 200 से अधिक चैंबरों को नुकसान पहुंचाया गया। देर शाम तक प्रशासनिक कार्रवाई रोक दी गई और बुलडोजर वापस लौट गए, लेकिन इलाके में तनाव बना रहा।
बार एसोसिएशन ने दी आंदोलन की चेतावनी
सेंट्रल बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। बार एसोसिएशन के महामंत्री अधिवक्ताओं के साथ सड़क पर धरने पर बैठ गए और न्यायिक कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी। वकीलों का कहना है कि जिन चैंबरों को हटाया गया, उनमें से कई को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
पुराना विवाद फिर बना टकराव की वजह
यह विवाद नया नहीं है। वर्ष 2020 से जिला अदालत परिसर के बाहर बने चैंबरों और अतिक्रमण को लेकर लगातार शिकायतें और कानूनी विवाद सामने आते रहे हैं। हाल के महीनों में अदालत में कई याचिकाएं दायर हुईं, जिसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। प्रशासन ने 12 मई को नोटिस जारी कर 16 मई तक जगह खाली करने को कहा था, लेकिन विरोध के बीच रविवार को कार्रवाई शुरू होते ही हालात विस्फोटक हो गए।
पूरे दिन बना रहा तनावपूर्ण माहौल
दोपहर बाद तक पुलिस, पीएसी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर डटे रहे। आसपास के दुकानदारों ने भी एहतियातन अपनी दुकानें बंद कर दीं। कई घायल अधिवक्ताओं और एक पुलिसकर्मी को अस्पताल पहुंचाया गया। देर शाम कार्रवाई रोक दी गई, लेकिन जिला अदालत परिसर के बाहर अब भी भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।






