EVM पर सियासी संग्राम! ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर सीधा हमला

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संवाद 24 पश्चिम बंगाल । विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले सियासी माहौल बेहद गरमाता जा रहा है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा है कि “EVM में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी” और इसके खिलाफ उनकी लड़ाई “जीवन-मरण” की तरह होगी। ममता बनर्जी के इस बयान ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में रिकॉर्ड मतदान हुआ है और नतीजों को लेकर राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज हैं।

EVM पर शक क्यों?
चुनाव के बाद कोलकाता के स्ट्रॉन्ग रूम में रखी गई EVM मशीनों को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कई सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि मशीनों की सुरक्षा में लापरवाही हुई है और कुछ संदिग्ध गतिविधियां भी देखी गईं। TMC ने दावा किया कि कुछ स्थानों पर CCTV फुटेज में कथित तौर पर अनधिकृत लोगों की मौजूदगी दिखी है, जिससे आशंका और गहरी हो गई। इस पूरे मामले को पार्टी ने “लोकतंत्र की हत्या” तक करार दिया।

“लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश” – ममता का आरोप
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उनकी पार्टी हर स्तर पर विरोध करेगी और EVM की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इससे पहले भी उन्होंने चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया था।

सियासी तनाव चरम पर
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव बेहद हाई-वोल्टेज रहा है। रिकॉर्ड मतदान (करीब 92% से अधिक) ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। जहां TMC को अपनी जीत का भरोसा है, वहीं भाजपा भी सरकार बनाने का दावा कर रही है। ऐसे में EVM विवाद ने पूरे चुनावी माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।

चुनाव आयोग का जवाब
इन आरोपों पर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि EVM की सुरक्षा के लिए सख्त व्यवस्था की गई है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित होती है। अधिकारियों का कहना है कि स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी 24×7 की जाती है और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं है। साथ ही, अगर कहीं शिकायत मिलती है तो जांच और कार्रवाई की जाएगी।

आगे क्या?
अब सभी की नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हैं। 4 मई को होने वाली काउंटिंग से पहले ही माहौल बेहद तनावपूर्ण हो चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर परिणाम उम्मीदों के विपरीत आए, तो यह विवाद और गहरा सकता है। वहीं, चुनाव आयोग के लिए भी यह चुनौती है कि वह पारदर्शिता बनाए रखते हुए सभी आरोपों का संतोषजनक जवाब दे।

निष्कर्ष
EVM को लेकर उठे सवाल केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला बन चुका है। ममता बनर्जी के तीखे तेवर और विपक्ष के आरोपों ने साफ कर दिया है कि इस बार चुनावी जंग सिर्फ वोटों तक सीमित नहीं है, बल्कि भरोसे की भी परीक्षा है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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