“2 महीने से बिना वेतन काम कर रहे डॉक्टर! रांची RIMS में घोटाले की जांच ने रोकी सैलरी”
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संवाद 24 झारखंड। राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में डॉक्टरों और कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। करीब 600 डॉक्टरों और स्टाफ को पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे अस्पताल के अंदर असंतोष बढ़ता जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला ट्रेजरी से जुड़े एक कथित घोटाले की जांच से जुड़ा हुआ है। जांच के चलते भुगतान प्रक्रिया बाधित हो गई है, जिसका सीधा असर डॉक्टरों और कर्मचारियों की सैलरी पर पड़ा है।
वेतन अटका, बढ़ी परेशानी
RIMS में कार्यरत डॉक्टर और कर्मचारी अब आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कई डॉक्टरों का कहना है कि लगातार दो महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया है। दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई और किराए जैसी जरूरी जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बन गया है। अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में काम करने वाले कर्मचारियों की यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है।
घोटाले की जांच बना वजह
बताया जा रहा है कि झारखंड के कई ट्रेजरी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है। इसी कारण से भुगतान की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। इस जांच का असर सिर्फ एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि कई सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर भी पड़ा है। RIMS के डॉक्टर और स्टाफ भी इसी वजह से प्रभावित हुए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
डॉक्टरों की नाराजगी और आर्थिक दबाव का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। हालांकि अभी तक कामकाज पूरी तरह जारी है, लेकिन अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो स्थिति बिगड़ सकती है।
पहले भी RIMS में वेतन और अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन और हड़ताल जैसी स्थिति सामने आ चुकी है, जिससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी थी।
डॉक्टरों की चेतावनी
सूत्रों के मुताबिक, अगर जल्द वेतन जारी नहीं किया गया तो डॉक्टर और कर्मचारी विरोध का रास्ता अपना सकते हैं। इससे अस्पताल की सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। डॉक्टरों का कहना है कि वे लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन बदले में समय पर वेतन न मिलना उनके मनोबल को तोड़ रहा है।
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस पूरे मामले ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बढ़ा दिया है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि जांच भी जारी रहे और कर्मचारियों को समय पर वेतन भी मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मामला बड़ा विवाद बन सकता है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और संबंधित विभाग कब तक इस समस्या का
समाधान निकालते हैं। यदि जल्द ही वेतन जारी नहीं किया गया, तो RIMS जैसे बड़े अस्पताल में सेवाएं प्रभावित होना तय माना जा रहा है, जिसका खामियाजा सीधे मरीजों को भुगतना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
RIMS में वेतन संकट केवल कर्मचारियों की समस्या नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी है। घोटाले की जांच जरूरी है, लेकिन इसके चलते डॉक्टरों और कर्मचारियों को आर्थिक संकट में डालना भी उचित नहीं माना जा रहा। अब देखना होगा कि प्रशासन इस संतुलन को कैसे संभालता है – क्योंकि यहां सवाल सिर्फ वेतन का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता का भी है।






