
संवाद 24 नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति के लिए अहम माने जा रहे जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय मुलाकात होने जा रही है। व्हाइट हाउस की ओर से इस बैठक की पुष्टि किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। दोनों नेताओं के बीच करीब 16 महीने बाद आमने-सामने बातचीत होगी, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
फ्रांस में होगा बड़ा कूटनीतिक मंच
फ्रांस के एवियन में 15 से 17 जून के बीच आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल होंगे। भारत भले ही जी-7 का सदस्य नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष आमंत्रित देश के नेता के रूप में बुलाया गया है। यह लगातार सातवां अवसर है जब प्रधानमंत्री मोदी जी-7 मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
16 महीने बाद आमने-सामने होंगे दोनों नेता
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच यह पहली प्रत्यक्ष मुलाकात होगी, जब से मोदी ने फरवरी 2025 में अमेरिका का दौरा किया था। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार संवाद चलता रहा है, लेकिन शीर्ष स्तर की आमने-सामने बैठक नहीं हुई थी। ऐसे में यह मुलाकात विशेष महत्व रखती है।
किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच व्यापार समझौते, निवेश, ऊर्जा सहयोग, तकनीकी साझेदारी, आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा और वीजा नीतियों जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि जी-7 सम्मेलन के दौरान किसी अंतिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की संभावना कम है, लेकिन बातचीत भविष्य की दिशा तय कर सकती है।
वैश्विक चुनौतियों पर भी होगा मंथन
द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर भी चर्चा होने की संभावना है। हाल के दिनों में ईरान से जुड़े घटनाक्रम और वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह बैठक और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फ्रांस यात्रा का व्यापक एजेंडा
प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा केवल जी-7 सम्मेलन तक सीमित नहीं है। वे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। दोनों देशों के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री कई वैश्विक नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकों में भी हिस्सा लेंगे।
ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने यात्रा से पहले कहा है कि भारत जी-7 मंच पर केवल अपने हितों की नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आकांक्षाओं और चिंताओं की भी आवाज उठाएगा। जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संकट और सतत विकास जैसे विषय भारत की प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।
दुनिया की निगाहें इस मुलाकात पर
विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी और ट्रंप की यह बैठक केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका प्रभाव इंडो-पैसिफिक रणनीति, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन पर भी पड़ सकता है। ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, दोनों नेताओं की बातचीत से महत्वपूर्ण संकेत निकल सकते हैं।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें फ्रांस में होने वाली इस बहुप्रतीक्षित मुलाकात पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों नेता किन मुद्दों पर सहमति बनाते हैं और क्या यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई देने में सफल रहती है। आने वाले दिनों में इस बैठक के नतीजे वैश्विक राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन सकते हैं।






