
संवाद 24 पश्चिम बंगाल। विधानसभा चुनाव 2026 का अंतिम चरण लोकतंत्र के इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में दर्ज होता दिख रहा है। राज्य में भारी मतदान ने न केवल राजनीतिक दलों की रणनीतियों को चुनौती दी है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि जनता इस बार अपने भविष्य को लेकर बेहद गंभीर है। अंतिम चरण में रिकॉर्ड स्तर पर मतदान दर्ज किया गया, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, दूसरे और आखिरी चरण में 90 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो राज्य के चुनावी इतिहास में सबसे ऊंचे स्तरों में गिना जा रहा है।
क्यों खास है यह चुनाव?
इस बार चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई बन गया है। एक ओर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए मैदान में है, तो दूसरी ओर भाजपा राज्य में मजबूत एंट्री की कोशिश कर रही है। कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के कई अहम जिलों में मतदान हुआ, जहां परिणाम तय करेंगे कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। इन इलाकों में राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी गर्म था और मतदान के दिन भी मतदाताओं का उत्साह देखने लायक रहा।
जनता का जोश, लंबी कतारें
सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। खास बात यह रही कि महिलाओं और युवाओं की भागीदारी इस बार काफी ज्यादा रही। कई जगहों पर बुजुर्ग और पहली बार वोट देने वाले मतदाता भी बड़ी संख्या में नजर आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की थी, जिसका असर साफ तौर पर देखने को मिला।
रिकॉर्ड बना कुल मतदान प्रतिशत
अगर पूरे चुनाव की बात करें, तो दोनों चरणों को मिलाकर कुल मतदान लगभग 92 प्रतिशत के आसपास पहुंच गया है। यह आंकड़ा आजादी के बाद के सबसे बड़े मतदान प्रतिशतों में शामिल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी भागीदारी यह दर्शाती है कि जनता बदलाव या स्थिरता—दोनों में से किसी एक के पक्ष में स्पष्ट संदेश देना चाहती है।
सुरक्षा और विवाद भी रहे चर्चा में
हालांकि चुनाव काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ स्थानों पर छिटपुट हिंसा और गड़बड़ियों की खबरें भी सामने आईं। चुनाव आयोग ने कुछ बूथों पर अनियमितताओं की जांच शुरू की है और जरूरत पड़ने पर पुनर्मतदान (री-पोल) कराने की संभावना भी जताई है। इसके अलावा, केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी, जिससे मतदान प्रक्रिया को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की कोशिश की गई।
किसके पक्ष में जाएगा रुझान?
उच्च मतदान प्रतिशत को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस इसे अपने समर्थन का संकेत बता रही है, वहीं भाजपा इसे बदलाव की लहर मान रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा मतदान का मतलब हमेशा सत्ता विरोधी लहर नहीं होता, बल्कि यह भी संभव है कि लोग मौजूदा सरकार को मजबूत समर्थन देने के लिए भी बड़ी संख्या में वोट डालें।
अब नजर नतीजों पर
मतदान खत्म होने के बाद अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं। यह चुनाव न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। जिस तरह से जनता ने उत्साह दिखाया है, उससे साफ है कि यह चुनाव सिर्फ नेताओं का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और उम्मीदों का चुनाव बन चुका है।






