खाड़ी में बढ़ी जंग की आहट! अमेरिका ने तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर उतारा, ईरान पर बढ़ा दबाव
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संवाद 24 नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन करते हुए तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भी तैनात कर दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान के साथ रिश्ते लगातार बिगड़ रहे हैं और समुद्री रास्तों को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की एंट्री से बढ़ी ताकत
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड क्षेत्र में अब तीन एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात हो चुके हैं। ताजा तैनाती USS George H.W. Bush की है, जो हिंद महासागर के रास्ते इस क्षेत्र में पहुंचा है। इससे पहले USS Gerald R. Ford और USS Abraham Lincoln पहले से ही तैनात थे। तीनों कैरियर के एक साथ मौजूद होने से अमेरिका की समुद्री और हवाई हमले की क्षमता कई गुना बढ़ गई है। यह तैनाती पिछले दो दशकों में सबसे बड़े सैन्य जमावड़ों में से एक मानी जा रही है।
ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति
इस सैन्य बढ़ोतरी का मुख्य मकसद ईरान पर दबाव बनाना बताया जा रहा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण करे और क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को खत्म करे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने खाड़ी में नौसैनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं और संदिग्ध जहाजों की जांच भी बढ़ा दी है। कुछ मामलों में जहाजों को रोका गया और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ बना टेंशन का केंद्र
खाड़ी क्षेत्र का सबसे अहम समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ इस समय तनाव का केंद्र बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के चलते इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। यही वजह है कि अमेरिका ने यहां अपनी मौजूदगी और मजबूत कर दी है।
हजारों सैनिक और आधुनिक हथियार तैनात
तीनों एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ हजारों सैनिक, आधुनिक लड़ाकू विमान और कई युद्धपोत भी तैनात हैं। इससे अमेरिका को एक साथ कई मोर्चों पर कार्रवाई करने की क्षमता मिलती है। इन कैरियर ग्रुप्स में अत्याधुनिक फाइटर जेट, मिसाइल सिस्टम और निगरानी उपकरण शामिल हैं, जो किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हैं।
क्या युद्ध की ओर बढ़ रहे हालात?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती सिर्फ सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि संभावित बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी भी हो सकती है। हालांकि अमेरिका की ओर से कहा गया है कि वह स्थिति को नियंत्रण में रखना चाहता है, लेकिन हालात तेजी से बदल रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कमजोर पड़ती दिख रही है, जिससे तनाव और बढ़ सकता है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में किसी भी समय हालात और बिगड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
2003 के बाद सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा
तीन एयरक्राफ्ट कैरियर की एक साथ तैनाती को 2003 के बाद का सबसे बड़ा अमेरिकी सैन्य जमावड़ा बताया जा रहा है। यह संकेत देता है कि अमेरिका इस क्षेत्र को लेकर बेहद गंभीर है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में है।
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या हालात और बिगड़ते हैं। फिलहाल, खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से पूरी दुनिया की नजरें इस इलाके पर टिकी हुई हैं। अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो यह टकराव बड़े संघर्ष का रूप भी ले सकता है – जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ना तय है।






