संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट से मचा वैश्विक विवाद, इज़राइल और रूस पर लगे गंभीर आरोप

संवाद 24 नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में पहली बार इज़राइल और रूस की सुरक्षा एवं सैन्य संस्थाओं को उन पक्षों की सूची में शामिल किया गया है जिन पर संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा से जुड़े गंभीर आरोप लगे हैं। इस कदम के बाद वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और कई देशों के बीच कूटनीतिक तनाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र की यह वार्षिक रिपोर्ट दुनिया भर में युद्ध और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में होने वाली यौन हिंसा की घटनाओं का दस्तावेजीकरण करती है। इस बार रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2025 के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जिनमें नागरिकों, बंदियों और युद्ध प्रभावित लोगों के साथ कथित तौर पर गंभीर दुर्व्यवहार किया गया।

पहली बार इज़राइल और रूस का नाम शामिल
रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली सुरक्षा बलों और रूस की सैन्य एवं सुरक्षा एजेंसियों को पहली बार इस सूची में शामिल किया गया है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि विभिन्न जांचों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यौन हिंसा से जुड़े कई मामलों की पुष्टि की गई है। रिपोर्ट में विशेष रूप से फिलिस्तीनी बंदियों और यूक्रेन संघर्ष से जुड़े मामलों का उल्लेख किया गया है। संयुक्त राष्ट्र का दावा है कि उसे ऐसे कई मामलों की जानकारी मिली जिनमें हिरासत में लिए गए लोगों के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किया गया।

संयुक्त राष्ट्र ने जताई जांच में बाधाओं की चिंता
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जांच एजेंसियों और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों को कई स्थानों पर पर्याप्त पहुंच नहीं मिल सकी, जिससे सभी मामलों की स्वतंत्र और व्यापक जांच करना कठिन हो गया। इसके बावजूद उपलब्ध गवाहियों, दस्तावेजों और अन्य स्रोतों के आधार पर कई घटनाओं को सत्यापित किया गया। संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों का कहना है कि संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं बल्कि युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले एक गंभीर हथियार के रूप में भी देखी जाती है। इसी वजह से ऐसे मामलों की निगरानी और दस्तावेजीकरण को विशेष महत्व दिया जाता है।

इज़राइल ने रिपोर्ट को बताया पक्षपातपूर्ण
रिपोर्ट सामने आने के बाद इज़राइल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र में इज़राइल के प्रतिनिधियों ने इस फैसले को अनुचित और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। इज़राइल का कहना है कि उसे जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और रिपोर्ट में लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों को नहीं दर्शाते।इज़राइल ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के कार्यालय के साथ अपने संबंधों को सीमित करने की भी घोषणा की है। इज़राइली अधिकारियों का कहना है कि उन्हें एक ऐसे संगठन के साथ सामान्य सहयोग बनाए रखना कठिन लग रहा है जो उनके अनुसार निष्पक्षता नहीं बरत रहा।

रूस पर भी लगे गंभीर आरोप
रिपोर्ट में रूस की सैन्य और सुरक्षा एजेंसियों का भी उल्लेख किया गया है। यूक्रेन संघर्ष के दौरान बंदियों और नागरिकों के साथ कथित यौन हिंसा के मामलों को आधार बनाते हुए रूस को भी सूची में शामिल किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार कई मामलों की पुष्टि की गई है और इन घटनाओं को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन माना गया है। हालांकि रूस पहले भी संयुक्त राष्ट्र की कई रिपोर्टों को खारिज करता रहा है और उसने इन आरोपों को लेकर आधिकारिक स्तर पर असहमति जताई है।

वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट का असर केवल मानवाधिकार बहस तक सीमित नहीं रहेगा। इससे कई देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों पर प्रभाव पड़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नए विवाद भी पैदा हो सकते हैं। विशेष रूप से मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप से जुड़े मुद्दों पर पहले से ही वैश्विक तनाव बना हुआ है। ऐसे में यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय संगठनों, मानवाधिकार समूहों और संबंधित देशों के बीच बहस को और तेज कर सकती है।

रिपोर्ट के बाद दुनिया की नजर अगली कार्रवाई पर
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि संयुक्त राष्ट्र आगे क्या कदम उठाता है और संबंधित देश इन आरोपों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं। मानवाधिकार संगठनों ने निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की है, जबकि कई देशों ने मामले पर सावधानीपूर्वक टिप्पणी करने का रुख अपनाया है। संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब दुनिया पहले से ही कई बड़े संघर्षों और मानवीय संकटों का सामना कर रही है। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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