
संवाद 24 नई दिल्ली। चीन एक बार फिर अपनी सैन्य गतिविधियों को लेकर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। हाल ही में सामने आई सेटेलाइट तस्वीरों ने यह संकेत दिया है कि चीन अपने उत्तर-पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में परमाणु मिसाइल साइलो के आसपास एक विशाल सैन्य परिसर विकसित कर रहा है। इस परियोजना को चीन की अब तक की सबसे बड़ी सामरिक सैन्य तैयारियों में से एक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्माण केवल रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की संभावित रणनीतिक चुनौतियों के लिए भी चीन खुद को तैयार कर रहा है।
सेटेलाइट तस्वीरों में दिखे 80 से अधिक लॉन्च पैड
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों द्वारा अध्ययन की गई नई तस्वीरों में 80 से अधिक लॉन्च पैड, बंकर, कम्युनिकेशन नेटवर्क और कई बड़े सैन्य ढांचे दिखाई दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार ये निर्माण कार्य शिनजियांग और गांसू क्षेत्र के उन इलाकों के पास हो रहे हैं जहां चीन के इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) साइलो मौजूद हैं। माना जा रहा है कि इन सुविधाओं का उपयोग मोबाइल मिसाइल लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
रेगिस्तान में बने रहस्यमयी अष्टकोणीय सैन्य ढांचे
सबसे ज्यादा ध्यान तीन विशाल अष्टकोणीय संरचनाओं ने खींचा है जो रेगिस्तान के बीचोंबीच विकसित की गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन ढांचों के आसपास सैनिक आवास, बख्तरबंद बंकर, हथियार भंडारण क्षेत्र और सैन्य वाहनों के संचालन की सुविधाएं मौजूद हैं। हालिया तस्वीरों में इन क्षेत्रों में सैन्य अभ्यास और भारी वाहनों की गतिविधियां भी दर्ज की गई हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि परिसर केवल निर्माणाधीन नहीं बल्कि धीरे-धीरे सक्रिय सैन्य उपयोग की दिशा में बढ़ रहा है।
चीन क्यों बढ़ा रहा है परमाणु सुरक्षा ढांचा?
विश्लेषकों का मानना है कि चीन अपनी “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” को मजबूत करना चाहता है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी दुश्मन देश द्वारा पहले परमाणु हमला किया जाए तो भी चीन जवाबी परमाणु हमला करने की क्षमता बनाए रख सके। यही कारण है कि मिसाइल साइलो के आसपास अतिरिक्त लॉन्च पैड, कमांड सेंटर और संचार नेटवर्क तैयार किए जा रहे हैं ताकि किसी भी संभावित हमले की स्थिति में परमाणु क्षमता सुरक्षित रह सके।
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
विशेषज्ञ इस सैन्य विस्तार को अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा से भी जोड़कर देख रहे हैं। ताइवान, दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के बीच सैन्य तैयारी लगातार तेज हुई है। ऐसे में चीन अपने परमाणु ढांचे को पहले से अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाने की दिशा में काम करता दिखाई दे रहा है।
तेजी से बढ़ रहा चीन का परमाणु भंडार
अमेरिकी रक्षा विभाग और कई अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों की रिपोर्टें पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि चीन पिछले कुछ वर्षों में अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम का तेजी से विस्तार कर रहा है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में चीन के परमाणु वारहेड्स की संख्या एक हजार तक पहुंच सकती है। इसी कारण नए साइलो, मिसाइल बेस और सुरक्षात्मक ढांचे बनाए जा रहे हैं।
भूमिगत नेटवर्क और आधुनिक संचार प्रणाली पर जोर
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि चीन अपने परमाणु नेटवर्क के लिए आधुनिक संचार और अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई सुविधाओं में सैटेलाइट कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सेंटर और सुरक्षित कमांड सिस्टम शामिल हो सकते हैं। इससे चीन की परमाणु प्रतिक्रिया क्षमता पहले की तुलना में अधिक तेज और संगठित हो सकती है।
दुनिया की बढ़ी चिंता, नई हथियार दौड़ की आशंका
चीन के इस सैन्य विस्तार ने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भविष्य में नई परमाणु हथियार दौड़ को जन्म दे सकता है। यदि अमेरिका, रूस और चीन के बीच सामरिक प्रतिस्पर्धा और बढ़ती है तो वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर चीन के रेगिस्तान में बन रहे इस विशाल सैन्य परिसर पर टिकी हुई है, जो आने वाले समय में एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।






