फर्रुखाबाद में धूमधाम से मनाया गया भगवान परशुराम जन्मोत्सव, कमलनयन दास महाराज ने दिया सामाजिक एकजुटता का संदेश
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फर्रुखाबाद में भगवान परशुराम जन्मोत्सव के अवसर पर रविवार को बद्री विशाल डिग्री कॉलेज परिसर में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। ब्राह्मण समाज जन सेवा समिति के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में अयोध्या छावनी क्षेत्र के महंत कमलनयन दास महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान परशुराम की प्रतिमा की साफ-सफाई, हवन-पूजन और आरती के साथ हुई। इसके बाद समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। आयोजन के दौरान सर्व समाज के लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम में सामाजिक समरसता का संदेश भी देखने को मिला।
समिति के संस्थापक नारायण दत्त द्विवेदी के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इनमें सदर विधायक की पत्नी अनीता द्विवेदी, जिलाधिकारी की पत्नी वंदना द्विवेदी, पूर्व बसपा प्रत्याशी अरुण मिश्रा, पूर्व शासन अध्यक्ष राजीव चतुर्वेदी, अखिल भारत हिंदू महासभा के युवा प्रदेश अध्यक्ष विमलेश मिश्रा और समाजवादी पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष राघव दत्त मिश्रा शामिल रहे।
नारी बंधन अधिनियम पर विपक्ष को घेरा
अपने संबोधन में महंत कमलनयन दास महाराज ने नारी बंधन अधिनियम का विरोध करने वालों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे राष्ट्रहित के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज समाज में राष्ट्र विरोधी विचार तेजी से पनप रहे हैं और जात-पांत के आधार पर समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है।
महंत ने कहा कि राष्ट्र, धर्म, कर्म और परंपराओं की रक्षा के लिए समाज को एकजुट रहना होगा। उन्होंने भगवान परशुराम को समाज का रक्षक और सुधारक बताते हुए कहा कि उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं। महंत ने समाज से भगवान परशुराम के बताए मार्ग पर चलने और समय के अनुसार सजग रहने का आह्वान किया।
विप्र समाज से एकजुटता की अपील
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने विप्र समाज से एकजुट होकर आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए संगठित रहना समय की आवश्यकता है। वक्ताओं ने भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने पर जोर दिया।
भगवान परशुराम जन्मोत्सव के इस आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और राजनीतिक संदेश भी देखने को मिला। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे समाज को जोड़ने वाला आयोजन बताया।






