युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं डॉ. आंबेडकर के विचार? गोष्ठी में हुआ विस्तृत मंथन
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संवाद 24 झांसी। भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर जी की जयंती के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, झांसी महानगर द्वारा मंगलवार को संघ कार्यालय माधव स्मृति भवन, झोकन बाग में एक विचारप्रधान गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रातः 10 बजे प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रबुद्ध नागरिकों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं स्वयंसेवकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का उद्देश्य डॉ. आंबेडकर के विचारों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाते हुए सामाजिक समरसता, समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता को मजबूत करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात उपस्थित सभी लोगों ने राष्ट्रगान के माध्यम से राष्ट्र के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कार्यक्रम स्थल पर अनुशासन, सादगी और गरिमा का वातावरण दिखाई दिया, जहां स्वयंसेवकों ने आगंतुकों का स्वागत कर उन्हें व्यवस्थित रूप से स्थान ग्रहण कराया।
गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. एम एम सिंह ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि डॉ. आंबेडकर ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और परिश्रम के बल पर सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही समाज में समानता और न्याय की स्थापना संभव है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. आंबेडकर के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता कानपुर प्रांत के सह प्रांत प्रचारक मुनीश जी ने अपने अपने प्रखर और ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन भारतीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन के माध्यम से यह सिद्ध किया कि कठिन परिस्थितियां भी व्यक्ति को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकतीं, यदि उसके भीतर दृढ़ इच्छाशक्ति और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने सामाजिक असमानता के विरुद्ध संघर्ष करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने का कार्य किया।
मुनीश जी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र के मूल्यों और आदर्शों का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि संविधान हमें समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का संदेश देता है, जिसे समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। मुनीश जी ने डॉ. अंबेडकर को उद्धृत करते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि “मैं यह महसूस करता हूं कि संविधान चाहे जितना बेहतर हो, अगर उसे लागू करने वाले लोग गलत हुए तो वह बुरा संविधान साबित होगा। इसी तरह एक संविधान चाहे जितना बुरा हो लेकिन अगर उसे लागू करने वाले लोग अच्छे हुए तो वह अच्छा संविधान साबित होगा।”
मुनीश जी ने कहा कि समाज में समरसता स्थापित किए बिना राष्ट्र की प्रगति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने शिक्षा, संगठन और संघर्ष के माध्यम से समाज को जागरूक करने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है और उसे अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करती है। उन्होंने कहा कि जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित होगा, तभी सामाजिक समता स्थापित हो सकेगी।
मुनीश जी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में भेदभाव और ऊंच-नीच की भावना राष्ट्र की एकता को कमजोर करती है। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को समान अवसर मिलना चाहिए और समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता केवल विचारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे व्यवहार में भी अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि डॉ. आंबेडकर ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए समाज को एक नई दिशा प्रदान की। उन्होंने कहा कि हमें उनके विचारों को केवल स्मरण करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करना ही डॉ. आंबेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मुख्य अतिथि कुंज बिहारी सिंह भास्कर जी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने शिक्षा के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाने का कार्य किया और यह सिद्ध किया कि ज्ञान ही व्यक्ति को सशक्त बनाता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने जीवन में अनुशासन और अध्ययन को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विशिष्ट अतिथि ओम प्रकाश वाल्मीकि जी ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर के विचार आज भी समाज को दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में समानता और न्याय की स्थापना के लिए सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा।
वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में डॉ. आंबेडकर के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने के लिए सभी नागरिकों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव राष्ट्र की प्रगति में बाधक होता है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने डॉ. आंबेडकर के विचारों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा, अनुशासन और परिश्रम के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में समरसता और एकता को मजबूत करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित रूप से किया गया तथा अंत में सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, गंभीरता और सकारात्मक वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम के माध्यम से डॉ. आंबेडकर के विचारों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास किया गया, जिससे समाज में समानता, न्याय और एकता की भावना को और अधिक बल मिल सके। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज को सकारात्मक दिशा देने में निरंतर सहायक सिद्ध होंगे।






