बस्तर से ‘लाल आतंक’ खत्म होने की कगार पर: अमित शाह की 3-स्तरीय रणनीति कैसे बनी गेमचेंजर

Share your love

संवाद 24 छत्तीसगढ़। बस्तर क्षेत्र में वर्षों से जारी नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में पहुंचता नजर आ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि बस्तर लगभग पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है और इसके पीछे सरकार की “3-स्तरीय रणनीति” सबसे बड़ा कारण बनी है।

नक्सलवाद पर निर्णायक वार: खत्म होने की कगार पर नेटवर्क
सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में नक्सल संगठनों का ढांचा तेजी से कमजोर हुआ है। शीर्ष नेतृत्व या तो मारा गया है या आत्मसमर्पण कर चुका है, जिससे उनकी कमांड संरचना लगभग टूट चुकी है।
देशभर में लंबे समय से चल रहा यह उग्रवाद अब सिमटकर कुछ गिने-चुने इलाकों तक रह गया है और बस्तर में इसका प्रभाव न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है।

3-स्तरीय रणनीति: कैसे बदली तस्वीर
गृह मंत्री द्वारा अपनाई गई रणनीति तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित रही –
सख्त सुरक्षा अभियान: जंगलों में लगातार ऑपरेशन चलाकर नक्सलियों के ठिकानों को खत्म किया गया।
विकास और कनेक्टिविटी: सड़क, मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया।
सरेंडर और पुनर्वास नीति: नक्सलियों को हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इस संयुक्त रणनीति ने न केवल नक्सलियों की ताकत को कमजोर किया, बल्कि स्थानीय लोगों का भरोसा भी सरकार की ओर बढ़ाया।

96% बस्तर हुआ नक्सल मुक्त
हाल के आंकड़ों के अनुसार, बस्तर का करीब 96% हिस्सा अब नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुका है।
हजारों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और कई बड़े कमांडर भी हथियार छोड़ चुके हैं, जिससे संगठन लगभग नेतृत्वविहीन हो गया है।

बंदूक से विकास की ओर: बदलती तस्वीर
जहां कभी नक्सल कैंप और हिंसा का डर था, वहां अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। सरकार ने सुरक्षा कैंपों को स्कूल, अस्पताल और अन्य सुविधाओं में बदलने की योजना बनाई है।
सड़क, बिजली और इंटरनेट जैसी सुविधाएं दूर-दराज के गांवों तक पहुंच रही हैं, जिससे आम लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है।

सरेंडर नीति: हथियार छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति
सरकार की पुनर्वास नीति का असर साफ दिख रहा है। बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। इससे न केवल हिंसा में कमी आई है, बल्कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता भी बढ़ी है।

2026 तक ‘नक्सल मुक्त भारत’ का लक्ष्य
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2026 तक पूरे देश को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें बस्तर सबसे अहम केंद्र रहा है। सरकार का मानना है कि अब समय आ गया है जब बस्तर ‘लाल आतंक’ से निकलकर विकास और संस्कृति का केंद्र बने।

भविष्य की दिशा: ‘डर’ से ‘विकास’ तक
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ विकास और सामाजिक विश्वास का यह मॉडल लंबे समय तक शांति बनाए रखने में मदद करेगा। हालांकि कुछ इलाकों में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन समग्र रूप से बस्तर में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। कुल मिलाकर, बस्तर की कहानी अब संघर्ष से सफलता की ओर बढ़ रही है – जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहां अब विकास और उम्मीद की नई किरण नजर आ रही है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News