
बलरामपुर से सामने आई इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया के दौरान पीड़ितों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुष्कर्म पीड़िता किशोरी ने कथित तौर पर लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से आहत होकर आत्मदाह कर लिया, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
गवाही के बाद बढ़ीं धमकियां, मानसिक दबाव में आई पीड़िता
मामले के अनुसार, नाबालिग पीड़िता ने करीब छह महीने पहले हुए दुष्कर्म प्रकरण में न्यायालय में गवाही दी थी। आरोप है कि गवाही देने के बाद आरोपी पक्ष के परिजनों ने उसे रास्ते में रोककर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया। न मानने पर जान से मारने और उसकी बहनों के साथ भी दुष्कर्म कराने की धमकियां दी गईं।इन लगातार धमकियों के कारण किशोरी गहरे मानसिक तनाव में आ गई थी, जिससे उसकी स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई।
आत्मदाह की घटना और मौत तक का सफर
परिजनों के अनुसार, एक मार्च को किशोरी ने अपने घर पर ही खुद को आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसने के बाद पहले स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, फिर हालत बिगड़ने पर उसे लखनऊ रेफर किया गया। लंबी चिकित्सा के बावजूद 17 मार्च को उसकी मृत्यु हो गई।
वीडियो में दर्ज किया दर्द, पहले भी दी थी शिकायत
घटना से पहले पीड़िता ने एक वीडियो भी बनाया था, जिसमें उसने आरोपी पक्ष द्वारा दी जा रही धमकियों का उल्लेख किया था। इस संबंध में पहले भी पुलिस को तहरीर दी गई थी, लेकिन आरोप है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी।
पुलिस कार्रवाई और जांच जारी
पीड़िता की मां की शिकायत पर पुलिस ने मुख्य आरोपी के परिजनों सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि गवाही देने वाले पीड़ितों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को पर्याप्त सुरक्षा और मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे बिना भय के न्याय प्रक्रिया में भाग ले सकें।






