UP पंचायत चुनाव पर सस्पेंस खत्म? मंत्री ओपी राजभर ने दी बड़ी टाइमलाइन
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उत्तर प्रदेश में लंबे समय से टल रहे पंचायत चुनाव को लेकर अब तस्वीर साफ होती दिख रही है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि राज्य में पंचायत चुनाव 12 जुलाई 2026 तक हर हाल में संपन्न करा लिए जाएंगे। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
चुनाव की तैयारी तेज, मतदाता सूची 15 अप्रैल तक
मंत्री राजभर के अनुसार चुनावी तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। जिलों में मतपत्रों की छपाई शुरू हो चुकी है और 15 अप्रैल तक मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा। इसके साथ ही सीटों के आरक्षण का निर्धारण भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा, जो चक्रानुसार होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चुनाव पुरानी व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे।
OBC आरक्षण पर सरकार का रुख साफ
पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। राजभर ने बताया कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही आरक्षण लागू किया जाएगा और कोई नई गणना नहीं कराई जाएगी। इसके अलावा आगामी कैबिनेट बैठक में OBC आयोग के गठन को मंजूरी मिलने की संभावना जताई गई है, जिससे आरक्षण प्रक्रिया को कानूनी मजबूती मिलेगी।
हाईकोर्ट की सख्ती से बढ़ा दबाव
इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या सरकार संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर पाएगी। याचिका में यह भी मांग की गई है कि चुनाव का पूरा शेड्यूल पहले से तय कर सार्वजनिक किया जाए।
26 मई की डेडलाइन और प्रशासनिक चुनौती
ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, जिससे पहले चुनाव कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है। यदि समय पर चुनाव नहीं होते हैं, तो प्रशासन को पंचायतों में प्रशासक नियुक्त करने पड़ सकते हैं। यही कारण है कि सरकार पर चुनाव जल्द कराने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
डिप्टी CM ने जताई थी देरी की आशंका
हालांकि, इससे पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संकेत दिए थे कि राज्य में चल रही जाति जनगणना, मकान गणना और अन्य प्रशासनिक कार्यों के चलते चुनाव में देरी संभव है। ऐसे में सरकार के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग संकेत देखने को मिले थे।
निष्कर्ष: चुनावी रणभूमि तैयार, अब नजर तारीखों पर
मंत्री राजभर के ताजा बयान ने जहां पंचायत चुनाव को लेकर स्पष्ट टाइमलाइन दी है, वहीं हाईकोर्ट की सख्ती और प्रशासनिक चुनौतियां इस प्रक्रिया को और अहम बना रही हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार तय समयसीमा के भीतर चुनाव सम्पन्न करवा पाती है या नहीं।






