पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार से पूछा, तय समय में क्यों नहीं हो रहे चुनाव?

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उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनाव को लेकर न्यायिक सख्ती बढ़ती नजर आ रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि आखिर संवैधानिक समय सीमा के भीतर पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं। अदालत ने यह भी पूछा है कि सरकार चुनाव कराने के लिए ठोस समय-सीमा तय कर पाई है या नहीं।

जनहित याचिका पर हुई सुनवाई, कोर्ट ने मांगा स्पष्ट कार्यक्रम

यह मामला एक जनहित याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष आया। अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन द्वारा दायर याचिका में मांग की गई थी कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए एक तय और पारदर्शी समयबद्ध कार्यक्रम बनाया जाए और उसे अदालत के समक्ष रखा जाए।

मामले की सुनवाई जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से पूछा कि चुनाव में देरी के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और क्या सरकार समय पर चुनाव कराने के लिए तैयार है।

OBC आरक्षण तय करने के लिए बनेगा समर्पित आयोग

सरकार की ओर से पहले ही हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक हलफनामा दाखिल किया जा चुका है। इसमें कहा गया है कि पंचायत चुनाव से पहले एक समर्पित पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग गठित किया जाएगा। यह आयोग पंचायतों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का निर्धारण करेगा। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही सीटों का आरक्षण तय होगा और फिर चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल इस आयोग के गठन और रिपोर्ट को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

सरकार के भीतर ही अलग-अलग बयान

पंचायत चुनाव को लेकर सरकार के अंदर भी अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने हाल ही में कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में पंचायत चुनाव समय पर कराना मुश्किल लग रहा है। उनके अनुसार राज्य में इस समय कई बड़े प्रशासनिक कार्य चल रहे हैं, जिनमें जाति आधारित सर्वेक्षण, SIR और मकान गणना जैसे कार्य शामिल हैं।इसके विपरीत पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर लगातार यह दावा कर रहे हैं कि पंचायत चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे और सरकार इसके लिए पूरी तरह तैयार है।

प्रशासनिक तैयारियां लगभग पूरी

सरकारी सूत्रों के अनुसार पंचायत चुनाव को लेकर कई तैयारियां पहले ही पूरी की जा चुकी हैं। मतपत्र छपकर जिलों में पहुंच चुके हैं और निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया में लगा है। बताया जा रहा है कि जैसे ही सरकार चुनाव की अधिसूचना जारी करेगी, चुनावी प्रक्रिया तेजी से शुरू हो सकती है।

राजनीतिक और प्रशासनिक नजरें अब सरकार के फैसले पर

हाईकोर्ट की सख्ती और सरकार के भीतर अलग-अलग बयानों के बीच अब सबकी नजर राज्य सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। यदि OBC आयोग का गठन और उसकी रिपोर्ट जल्द आती है तो पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान भी जल्द संभव है।

फिलहाल अदालत के सवालों ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है और यह साफ संकेत दिया है कि पंचायत चुनाव को लेकर सरकार को जल्द स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करना पड़ सकता है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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