हरदोई में सात महीने से लापता किशोरी का रहस्य गहराया: पिता और चार भाइयों का लाई डिटेक्टर टेस्ट
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उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सात महीने से लापता एक किशोरी का मामला अब और भी गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। पुलिस को अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिलने के बाद अदालत की अनुमति से किशोरी के पिता और चार भाइयों का लाई डिटेक्टर (पॉलीग्राफ) टेस्ट कराने का फैसला लिया गया है। पुलिस टीम पांचों को मेडिकल परीक्षण कराने के बाद जांच के लिए गाजियाबाद ले गई है। इस कदम से मामले की जांच में नया मोड़ आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सात अगस्त 2025 से लापता है किशोरी
जानकारी के अनुसार हरदोई जिले के लोनार कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली किशोरी 5 अगस्त 2025 को घर से चारा लेने की बात कहकर निकली थी। देर शाम तक घर वापस न लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बावजूद जब किशोरी का कोई पता नहीं चला तो परिवार ने पुलिस को सूचना दी।
इसके बाद पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अपहरण और बहला-फुसलाकर ले जाने की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। हालांकि महीनों बीत जाने के बावजूद पुलिस को किशोरी के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी।
सर्विलांस और मुखबिर तंत्र भी रहा नाकाम
पुलिस ने किशोरी का सुराग लगाने के लिए सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और मुखबिर तंत्र का सहारा लिया, लेकिन इन सभी प्रयासों के बावजूद जांच एजेंसियों को कोई सफलता नहीं मिली। सात महीने बीत जाने के बाद भी मामला रहस्य बना हुआ है, जिससे पुलिस पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।
कोर्ट की अनुमति के बाद पॉलीग्राफ टेस्ट
मामले की जांच कर रहे सीओ हरपालपुर सतेंद्र सिंह ने अदालत से किशोरी के पिता और चार भाइयों का लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की अनुमति मांगी थी। न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने सभी पांचों परिजनों का सौ शैय्या संयुक्त चिकित्सालय में मेडिकल परीक्षण कराया। इसके बाद पुलिस टीम उन्हें टेस्ट के लिए गाजियाबाद ले गई।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पॉलीग्राफ टेस्ट से जांच में कुछ अहम सुराग मिल सकते हैं, जिससे किशोरी के गायब होने की गुत्थी सुलझाने में मदद मिल सकती है।
चार बार बदले जा चुके हैं जांच अधिकारी
इस संवेदनशील मामले में पुलिस की जांच लगातार बदलती रही है। शुरुआत में केस की विवेचना उपनिरीक्षक दिनेश मिश्रा को दी गई थी। बाद में इसे तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक अजय गौतम को सौंपा गया। उनके निलंबन के बाद प्रेम सागर सिंह को जांच सौंपी गई, फिर प्रभारी निरीक्षक राकेश यादव ने भी इस मामले की विवेचना की।
लगातार असफलता मिलने के बाद अब इस पूरे मामले की जांच स्वयं सीओ हरपालपुर सतेंद्र सिंह कर रहे हैं।
लाई डिटेक्टर टेस्ट से खुल सकता है रहस्य
पुलिस का मानना है कि पॉलीग्राफ टेस्ट के जरिए पूछताछ में मिले संकेतों से जांच को नई दिशा मिल सकती है। सात महीने से लापता किशोरी का मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की नजर इस टेस्ट के नतीजों पर टिकी हुई है।






