शंकराचार्य के दरबार पहुंचे अखिलेश यादव, मुलाकात के मायने क्या हैं?

उत्तर प्रदेश की राजनीति और धर्म जगत के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात उस समय चर्चा में आ गई जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रवास पर आए ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की। यह मुलाकात उस समय हुई जब शंकराचार्य राजधानी में गो-रक्षा और गाय की प्रतिष्ठा को लेकर चलाए जा रहे “गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान” के तहत कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।

संतों को हाथ जोड़कर किया प्रणाम, सम्मानजनक माहौल में हुई मुलाकात

जानकारी के अनुसार शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों लखनऊ के कृष्णा नगर क्षेत्र में प्रवास कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव उनसे मिलने पहुंचे, जहां उन्होंने पहले वहां मौजूद संत-महात्माओं को हाथ जोड़कर प्रणाम किया।
इस दौरान उनके साथ पूर्व सांसद अनु टंडन भी मौजूद रहीं। मुलाकात पूरी तरह सम्मानजनक वातावरण में हुई और दोनों पक्षों के बीच धर्म, गौ-संरक्षण और समसामयिक सामाजिक मुद्दों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।

तीन दिवसीय ‘गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान’ की शुरुआत

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने लखनऊ में तीन दिवसीय गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान का शुभारंभ किया है। इस अभियान का उद्देश्य गाय को राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और आस्था के प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए समाज में जागरूकता फैलाना बताया जा रहा है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, साधु और समर्थक शामिल हुए। प्रशासन ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी थी, जिसे लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा रही।

सभा में शंकराचार्य का अनोखा अंदाज

सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने हल्के व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यह कोई शराब की दुकान नहीं बल्कि “शुद्ध गाय की दुकान” है। उनका आशय यह था कि यहां केवल वही लोग पहुंचे हैं जो वास्तव में गो-रक्षा के लिए समर्पित हैं।
उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से अपना नाम दर्ज कराने की अपील भी की और कहा कि यह अभियान आगे चलकर एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है।

भाजपा पर भी साधा तंज

अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य ने भाजपा पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि “भाजपा अब भागपा बन गई है”, उनका संकेत यह था कि दबाव और परिस्थितियों के कारण कई लोग पीछे हट रहे हैं, जबकि सच्चे गो-भक्त कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहते हैं।
उनके इस बयान को राजनीतिक रूप से भी काफी महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि गौ-रक्षा का मुद्दा लंबे समय से भारतीय राजनीति में संवेदनशील विषय रहा है।

कार्यक्रम में कुछ देर के लिए हुआ हंगामा

कार्यक्रम के दौरान एक महिला मंच तक पहुंचने का प्रयास कर रही थी, जिसे पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान महिला और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। बाद में पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया और कार्यक्रम फिर से सामान्य रूप से जारी रहा।

राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मुलाकात

विशेषज्ञों का मानना है कि शंकराचार्य और अखिलेश यादव की यह मुलाकात केवल धार्मिक शिष्टाचार भर नहीं है, बल्कि इसका राजनीतिक संदेश भी है। उत्तर प्रदेश में आने वाले चुनावों से पहले धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर होने वाली ऐसी मुलाकातें राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *