संघ की बैठकों में पहुंचे सीएम योगी, स्वयंसेवकों के सवालों से घिरी सरकार
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और योगी सरकार के बीच बढ़ती सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के विभिन्न शहरों में आयोजित संघ की समन्वय बैठकों में भाग लिया, जहां स्वयंसेवकों ने सरकार की नीतियों और जमीनी मुद्दों पर सीधे सवाल पूछे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिलसिला आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से भी जुड़ा हो सकता है।
पांच शहरों में हुई समन्वय बैठकें, मुख्यमंत्री की सीधी भागीदारी
सूत्रों के अनुसार पिछले एक महीने के भीतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर, लखनऊ, मथुरा-आगरा मंडल, प्रयागराज और कानपुर में आयोजित संघ की बैठकों में हिस्सा लिया। इन बैठकों का उद्देश्य सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और जमीनी स्तर पर मिल रहे फीडबैक को समझना बताया जा रहा है।
विशेष बात यह रही कि इन बैठकों में स्वयंसेवकों ने प्रदेश सरकार के कामकाज, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक रणनीति पर खुलकर सवाल उठाए, जिनका जवाब मुख्यमंत्री ने स्वयं दिया।
शंकराचार्य विवाद पर भी हुई चर्चा
इन बैठकों में हाल के दिनों में चर्चा में रहे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि स्वयंसेवकों ने इस विवाद को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल किए।
मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य से जुड़े मामलों में सरकार की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई हुई थी। राजनीतिक हलकों में इसे सरकार और संत समाज के बीच बढ़ते संवाद का संकेत माना जा रहा है।
संघ की बढ़ती सक्रियता के क्या मायने?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में संघ ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में संघ का नेटवर्क बेहद मजबूत माना जाता है।
ऐसे में समन्वय बैठकों के माध्यम से सरकार तक जमीनी स्तर के सुझाव और फीडबैक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, ताकि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बन सके।
2027 विधानसभा चुनाव पर भी नजर
विश्लेषकों के मुताबिक 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा और संघ दोनों ही आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सतर्क दिखाई दे रहे हैं। यही वजह है कि संगठन स्तर पर रणनीति, सामाजिक समीकरण और कार्यकर्ताओं के फीडबैक पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
माना जा रहा है कि आने वाले समय में संघ और भाजपा के बीच इसी तरह की समन्वय बैठकों का सिलसिला और तेज हो सकता है।






