लखनऊ में शंकराचार्य की “गौ माता प्रतिष्ठा संकल्प महासभा” को मिली अनुमति, प्रशासन ने लगाईं कड़ी शर्तें
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लखनऊ में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा प्रस्तावित “गौ माता प्रतिष्ठा संकल्प महासभा” को प्रशासन ने सशर्त अनुमति प्रदान कर दी है। यह महासभा 11 मार्च को राजधानी के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था, यातायात और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए कई सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
वाराणसी से शुरू हुई “गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध” पदयात्रा
इस महासभा से पहले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने वाराणसी से लखनऊ तक पदयात्रा प्रारंभ की थी, जिसे उन्होंने “गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध” का नाम दिया है। 7 मार्च को शुरू हुई यह यात्रा कई जिलों से गुजरते हुए राजधानी पहुंच रही है। यात्रा के दौरान संत-महात्माओं, गौ भक्तों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उनके साथ जुड़ी हुई है, जो गौ संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने का संदेश दे रहे हैं।
कई जिलों से गुजरते हुए लखनऊ पहुंची यात्रा
वाराणसी से शुरू हुई यह पदयात्रा जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली और उन्नाव सहित कई जिलों से होकर गुजरी। विभिन्न स्थानों पर संत समाज और स्थानीय श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य का स्वागत किया तथा गौ रक्षा के मुद्दे पर समर्थन व्यक्त किया। यात्रा के दौरान आयोजित सभाओं और संवाद कार्यक्रमों में गौ संरक्षण, सनातन परंपराओं के संरक्षण और गौ आधारित कृषि व्यवस्था पर भी चर्चा की गई।
गौ माता को “राष्ट्रमाता” का दर्जा देने की मांग
इस अभियान के माध्यम से शंकराचार्य ने देशभर में गौ संरक्षण के लिए कड़े कानून बनाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि गौ माता भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है, इसलिए उन्हें “राष्ट्रमाता” या “राज्यमाता” का दर्जा दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देशभर में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गौशालाओं के संरक्षण के लिए प्रभावी नीति बनाने की भी मांग की है।
सरकार को दिया था 40 दिनों का अल्टीमेटम
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस अभियान की शुरुआत से पहले उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिनों का अल्टीमेटम भी दिया था। उनका कहना था कि यदि गौ संरक्षण से जुड़ी मांगों पर सरकार ठोस कदम नहीं उठाती है तो व्यापक जन आंदोलन चलाया जाएगा। इसी क्रम में वाराणसी से लखनऊ तक पदयात्रा का आयोजन किया गया, जिसे संत समाज का व्यापक समर्थन मिल रहा है।
प्रशासन ने लागू कीं कई सख्त शर्तें
लखनऊ प्रशासन ने कार्यक्रम को अनुमति देते हुए कई शर्तें लागू की हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सभा के दौरान किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण नहीं दिया जाएगा। साथ ही राजनीतिक या धार्मिक व्यक्तियों के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी करने पर भी प्रतिबंध रहेगा।
इसके अलावा कार्यक्रम स्थल पर वाहनों की सीमित संख्या में ही प्रवेश दिया जाएगा और पार्किंग की व्यवस्था इस तरह की जाएगी कि यातायात बाधित न हो। केवल पारंपरिक ध्वज-दंड की अनुमति होगी, जबकि किसी भी प्रकार की घातक वस्तु लाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी आयोजकों पर
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था होने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी आयोजकों की होगी। यदि तय शर्तों का उल्लंघन किया गया तो कार्यक्रम की अनुमति तत्काल निरस्त की जा सकती है और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान तैनात पुलिस बल का खर्च भी आयोजकों को वहन करना होगा।
ध्वनि प्रदूषण और यातायात नियमों का पालन अनिवार्य
प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। शांत क्षेत्र में लाउडस्पीकर या तेज ध्वनि वाले उपकरणों के उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा। ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के तहत निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
ड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना
गौ माता प्रतिष्ठा संकल्प महासभा को लेकर संत समाज और गौ भक्तों के बीच उत्साह देखा जा रहा है। अनुमान है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। प्रशासन और पुलिस विभाग ने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं।
गौ संरक्षण पर केंद्रित रहेगा महासभा का संदेश
11 मार्च को होने वाली इस महासभा में गौ संरक्षण, गौशालाओं के विकास और गौ आधारित अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। संत समाज का मानना है कि गौ माता भारतीय जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और उनके संरक्षण के लिए समाज तथा सरकार दोनों को मिलकर ठोस पहल करनी चाहिए।
लखनऊ में आयोजित होने जा रही यह महासभा धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संत समाज इस मंच से क्या संदेश देता है और गौ संरक्षण को लेकर सरकार के सामने कौन-कौन सी मांगें रखी जाती हैं।






