यूपी मंत्रिमंडल विस्तार पर ब्रेक! चुनावी व्यस्तताओं के बीच टला फैसला
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से चर्चा में चल रहे मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर फिलहाल इंतजार और बढ़ता नजर आ रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में योगी सरकार तत्काल मंत्रिमंडल विस्तार करने के पक्ष में नहीं दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि देश के विभिन्न राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के बाद ही इस विषय पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इससे मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायकों की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगा है।
कई राज्यों के चुनावों में व्यस्त केंद्रीय नेतृत्व
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु समेत पांच राज्यों में होने वाले चुनावों की वजह से भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इन दिनों चुनावी रणनीति में व्यस्त है। इसके अलावा बिहार में नई राजनीतिक परिस्थितियों और मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण जैसी प्रक्रियाओं के चलते भी शीर्ष नेतृत्व का पूरा ध्यान राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर केंद्रित है। ऐसे में उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला कुछ समय के लिए टल सकता है।
योगी सरकार में फिलहाल इतने मंत्री, अभी भी कई पद खाली
वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री सहित कुल 53 मंत्री शपथ ले चुके हैं। हालांकि कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद अब केंद्र सरकार में मंत्री बन चुके हैं और राज्य मंत्री अनूप प्रधान वाल्मीकि लोकसभा सदस्य बन गए हैं, जिसके कारण मंत्रिमंडल में दो पद रिक्त हो गए हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं, इस लिहाज से अभी भी मंत्रिमंडल में लगभग नौ पद खाली बताए जा रहे हैं।
पहले भी चुनाव से पहले हुआ था मंत्रिमंडल विस्तार
गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से लगभग छह महीने पहले 26 सितंबर 2021 को भी योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार किया गया था। उस समय कुल सात मंत्रियों ने शपथ ली थी। इनमें जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था, जबकि पलटू राम, संजय कुमार गोंड, संगीता बलवंत बिंद, धर्मवीर प्रजापति, दिनेश खटीक और छत्रपाल सिंह गंगवार को राज्य मंत्री बनाया गया था।
चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर होगा अंतिम निर्णय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावी समीकरणों और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए भाजपा नेतृत्व मंत्रिमंडल विस्तार पर फैसला करेगा। पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद ही नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। फिलहाल पार्टी कार्यकर्ताओं और कई विधायकों की नजरें इस संभावित विस्तार पर टिकी हुई हैं।






