गोवंश आश्रय स्थल में चारा आपूर्ति पर उठे सवाल, अहिरोरी ब्लॉक के गोपालपुर में चार लाख की निकासी से मचा हड़कंप

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हरदोई जनपद में निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों पर भूसा, चारा और दाना आपूर्ति को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ताजा मामला विकास खंड अहिरोरी की ग्राम पंचायत गोपालपुर से जुड़ा है, जहां करीब चार लाख रुपये की निकासी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आए तथ्यों के अनुसार इस भुगतान प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और संभावित मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

अधिकृत फर्म के बावजूद स्थानीय स्तर से हो रही आपूर्ति

जानकारी के अनुसार अहिरोरी ब्लॉक में गोवंश आश्रय स्थलों के लिए भूसा, दाना और चारा आपूर्ति हेतु रायबरेली की शिव इंटरप्राइजेज नामक फर्म को अधिकृत किया गया है। प्रत्येक माह ग्राम पंचायतों द्वारा ब्लॉक स्तर पर मांग भी भेजी जाती है, लेकिन आरोप है कि चयनित फर्म द्वारा नियमित आपूर्ति नहीं की जाती। ऐसे में ग्राम पंचायतों को मजबूरी में स्थानीय पंजीकृत फर्मों से सामग्री खरीदनी पड़ती है और भुगतान भी उसी आधार पर किया जाता है।

इस स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब वास्तविक आपूर्ति स्थानीय स्तर से ही हो रही है तो ब्लॉक स्तर पर अधिकृत फर्म के चयन का उद्देश्य क्या रह जाता है।

गोपालपुर में चार लाख की चेक निकासी पर उठे सवाल

ग्राम पंचायत गोपालपुर में कथित अनियमितता का मामला और गंभीर दिखाई दे रहा है। आरोप है कि यहां पूर्व सचिव अंशुमान सिंह और ग्राम प्रधान राम शंकर के संयुक्त हस्ताक्षर से 28 जनवरी 2026 को लगभग चार लाख रुपये का चेक काटकर धनराशि निकाली गई। जानकारी के मुताबिक चेक पर तिथि नवंबर माह की दर्शाई गई थी, जबकि ग्राम पंचायत में नई सचिव आकांक्षा सिंह के हस्ताक्षर बैंक में 11 फरवरी 2026 को अपडेट हुए थे।

बताया जा रहा है कि नई सचिव द्वारा दिसंबर माह के भुगतान के रूप में लगभग 1.75 लाख रुपये का भुगतान भी हस्ताक्षर अपडेट होने के बाद ही किया गया था। ऐसे में पहले से जारी चेक और उसके भुगतान को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

कपड़े की दुकान के नाम पर काटी गई चेक, जांच की मांग

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह बताया जा रहा है कि चार लाख रुपये की जो चेक जारी की गई, वह रियाज वस्त्रालय, प्रताप नगर चौराहा बेनीगंज नामक फर्म के नाम से काटी गई। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या कपड़े के व्यवसाय से जुड़ी फर्म को गोवंश आश्रय स्थल के लिए भूसा, चारा और दाना आपूर्ति का भुगतान किया जा सकता है।

इसके अलावा चेक पर प्रधान के हस्ताक्षर भी अलग-अलग प्रकार से होने की बात सामने आई है, जिससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

छुट्टी पर गए सचिव के हस्ताक्षर कैसे हुए?

जानकारी के अनुसार पूर्व सचिव अंशुमान सिंह 15 दिसंबर 2025 से अवकाश पर चले गए थे और बताया जा रहा है कि वे इस समय आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि यदि वे उस समय अवकाश पर थे तो नवंबर माह की तिथि दर्शाकर चेक पर हस्ताक्षर और मुहर किसने की।

यह भी बताया जा रहा है कि चेक पर ग्राम पंचायत अधिकारी के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, जबकि उस पर लगी मुहर ग्राम विकास अधिकारी की है। इस विरोधाभास को भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है।

संभावित सिंडिकेट की आशंका, निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस पूरे प्रकरण में कुछ ब्लॉक कर्मचारियों, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और बैंक कर्मियों की मिलीभगत से भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाती है। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले ने प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

जिले के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके और निर्दोषों को किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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