बांग्लादेश में संवैधानिक संकट के बीच 12 मार्च से शुरू होगा संसद का सत्र, कौन संभालेगा स्पीकर की कुर्सी?

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संवाद 24 नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। लंबे समय से चल रही राजनीतिक उठापटक और अस्थिरता के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने आधिकारिक तौर पर नवनिर्वाचित संसद का पहला सत्र बुलाने का आदेश जारी कर दिया है। यह सत्र आगामी 12 मार्च को सुबह 11 बजे शुरू होगा। इस कदम को देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से पटरी पर लाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि कई संवैधानिक चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।

संविधान के अनुच्छेद 72(1) का प्रयोग
जातीय संसद (बांग्लादेश की संसद) द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 72(1) के तहत प्राप्त अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह सत्र बुलाया है। नियमानुसार, चुनाव परिणामों की राजपत्र अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के भीतर नवनिर्वाचित संसद का उद्घाटन सत्र बुलाना अनिवार्य होता है। यह निर्णय प्रधानमंत्री की लिखित सलाह के आधार पर लिया गया है।

स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति: एक बड़ा सवाल?
इस सत्र की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उद्घाटन बैठक की अध्यक्षता कौन करेगा। आमतौर पर, पिछली संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) ही नई संसद के पहले सत्र की अध्यक्षता करते हैं। यदि वे उपलब्ध न हों, तो उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) को यह जिम्मेदारी दी जाती है। परंतु, बांग्लादेश में स्थिति काफी पेचीदा है। पूर्व स्पीकर डॉ. शिरीन शर्मिन चौधरी ने राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और वर्तमान में वह किसी अज्ञात स्थान पर रह रही हैं। वहीं, डिप्टी स्पीकर शमसुल हक तुकु इस समय जेल में बंद हैं। ऐसी स्थिति में संसद की पहली कार्यवाही कैसे संचालित होगी और नए अध्यक्ष का चुनाव किस प्रक्रिया के तहत होगा, इसे लेकर देश के कानून विशेषज्ञों और राजनीतिक गलियारों में भारी उत्सुकता और चिंता बनी हुई है।

अस्थिरता के बाद नई उम्मीद
बांग्लादेश पिछले कुछ समय से गंभीर राजनीतिक संकट और छात्र आंदोलनों के बाद सत्ता परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन और मोहम्मद यूनुस के बीच हालिया तनाव की खबरों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। ऐसे माहौल में संसद सत्र का शुरू होना यह संकेत देता है कि देश अब एक निर्वाचित सरकार और सुव्यवस्थित विधायी प्रणाली की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
12 मार्च को होने वाले इस सत्र के मद्देनजर ढाका में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। संसद भवन के आसपास के क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन या सभा पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य है कि बिना किसी बाधा के सांसदों का शपथ ग्रहण और नई कार्यसमिति का गठन पूरा हो सके। 12 मार्च को शुरू होने वाला यह सत्र केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश के भविष्य की दिशा तय करने वाला साबित होगा। क्या यह नई संसद देश में शांति और स्थिरता बहाल कर पाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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