जेएनयू बना अखाड़ा: आधी रात को खूनी संघर्ष, लाठी-डंडों से छात्रों पर हमला, ‘मॉब लिंचिंग’ के गंभीर आरोप
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संवाद 24 नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस उठा है। रविवार की देर रात और सोमवार तड़के कैंपस के भीतर छात्र संगठनों के बीच हुआ विवाद खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच हुई इस भिड़ंत में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद कैंपस में तनाव का माहौल है और भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।
आधी रात का ‘खौफनाक मंजर’
प्रत्यक्षदर्शियों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना रात करीब 1:00 से 1:30 बजे के बीच शुरू हुई। बताया जा रहा है कि वामपंथी संगठनों (SFI और AISA) द्वारा विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘समानता मार्च’ (Samta Juloos) निकाला जा रहा था। यह मार्च जैसे ही ईस्ट गेट की ओर बढ़ा, वहां मौजूद छात्रों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते यह बहस मारपीट में बदल गई और कैंपस युद्ध का मैदान बन गया।
ABVP का आरोप: “पढ़ रहे छात्रों को बनाया निशाना”
ABVP ने इस घटना को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि उनके कार्यकर्ताओं के साथ ‘मॉब लिंचिंग’ जैसी स्थिति पैदा की गई। ABVP के अनुसार, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के पास उनके एक सदस्य प्रतीक भारद्वाज पर जानलेवा हमला किया गया। आरोप है कि हमलावरों ने पहले प्रतीक की आंखों में ‘फायर एक्सटिंग्विशर’ (अग्निशामक यंत्र) का पाउडर झोंक दिया ताकि वह कुछ देख न सके और फिर उसे बेरहमी से पीटा गया। ABVP के संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने सोशल मीडिया पर इस रात को ‘आतंक की रात’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि करीब 300 से 400 नकाबपोश उपद्रवियों की भीड़ ने लाइब्रेरी और रीडिंग रूम में घुसकर शांति से पढ़ रहे छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। आरोप है कि विजय नाम के एक अन्य छात्र को भी 100 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने घेरकर बुरी तरह घायल कर दिया।
वामपंथी संगठनों का पलटवार: “ABVP ने किया पथराव”
दूसरी ओर, वामपंथी संगठनों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सारा दोष ABVP पर मढ़ा है। आईसा (AISA) और एसएफआई (SFI) का दावा है कि जब वे शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, तब ABVP के कार्यकर्ताओं ने उन पर पथराव शुरू कर दिया। उनका कहना है कि यह हमला उनके लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन को दबाने और विश्वविद्यालय प्रशासन की विफलताओं से ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी साजिश थी। वामपंथी छात्र नेताओं का आरोप है कि इस दौरान सुरक्षाकर्मी और पुलिस मूकदर्शक बने रहे।
कैंपस में दहशत और पुलिस की कार्रवाई
इस खूनी झड़प में घायल हुए छात्रों को तुरंत एम्स ट्रॉमा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन कैंपस के भीतर छात्रों में भारी डर व्याप्त है। दिल्ली पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए फ्लैग मार्च किया और विश्वविद्यालय प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि दोषियों की पहचान की जा सके। यह पहली बार नहीं है जब जेएनयू में वैचारिक मतभेद हिंसा का रूप ले चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में रामनवमी, शिवाजी जयंती और चुनाव प्रक्रियाओं के दौरान भी ऐसी ही घटनाएं सामने आती रही हैं। शिक्षा के इस मंदिर में लगातार होती हिंसा ने अब एक बार फिर छात्र सुरक्षा और कैंपस की लोकतांत्रिक गरिमा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।






