नवाबगंज थाना छावनी में तब्दील, वकीलों का जोरदार प्रदर्शन
Share your love

संवाद 24 संवाददाता। कानपुर में शनिवार शाम उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी को पूछताछ के लिए थाने ले जाने की चर्चा कचहरी परिसर में तेजी से फैल गई। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता नवाबगंज थाने पहुंच गए और देखते ही देखते मामला तूल पकड़ गया।
पदाधिकारियों के पहुंचते ही वकीलों ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। राकेश तिवारी को तत्काल छोड़ने की मांग पर अड़े वकीलों ने नवाबगंज थाने का घेराव कर लिया। हालात बिगड़ते देख पुलिस प्रशासन ने एहतियातन 10 थानों का फोर्स और पीएसी मौके पर तैनात कर दी। देर रात तक थाना क्षेत्र छावनी में तब्दील रहा।
देर रात तक चला हंगामा
पुलिस अधिकारियों ने जब यह स्पष्ट किया कि राकेश तिवारी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि केवल पूछताछ की जा रही है, तब जाकर स्थिति कुछ हद तक शांत हुई। हालांकि इसके बावजूद वकील थाने में ही डटे रहे। रात करीब 12:35 बजे तीनों लोगों को मुचलके पर छोड़े जाने के बाद वकीलों ने एक बार फिर नारेबाजी की और तब जाकर प्रदर्शन समाप्त हुआ।
दोनों पक्ष आमने सामने, बढ़ा तनाव
इसी दौरान राजाराम वर्मा पक्ष के लोग भी नवाबगंज थाने पहुंच गए। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से टकराव की स्थिति बन गई। एक पक्ष पुलिस के खिलाफ नारे लगा रहा था, तो दूसरा पक्ष ‘पुलिस जिंदाबाद’ के नारे लगा रहा था। धक्का-मुक्की की नौबत आने पर मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं ने ही हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला।
50 लाख में हत्या की सुपारी का दावा
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि राजाराम वर्मा की हत्या 50 लाख रुपये में तय की गई थी। इस हत्या की सुपारी चौबेपुर निवासी दिलनियाज को दी गई थी, जिसमें पांच लाख रुपये अग्रिम और शेष रकम बाद में देने की बात तय हुई थी। हालांकि हत्या के बाद सुपारी किलर को मात्र 13 हजार रुपये ही मिले। पुलिस के अनुसार, इसके बाद दिलनियाज बिठूर फत्तेपुर निवासी अंकित यादव और बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी के खिलाफ हो गया था। जांच में सामने आया है कि उसने कोर्ट और जेल दोनों जगह अंकित यादव के साथ मारपीट की थी और एक और हत्या की योजना भी बना रहा था। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने उससे पूछताछ की, जिसमें उसने पूरी साजिश उजागर की।
जमीन सौदे से जुड़ा एंगल भी जांच में
पुलिस आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2018 में राजाराम वर्मा की बहू रेखा वर्मा ने दो वकीलों के साथ जमीन का एग्रीमेंट किया था। दिसंबर 2021 में राजाराम वर्मा की हत्या के बाद दोनों वकीलों ने उस एग्रीमेंट से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी ने उसी जमीन का एग्रीमेंट किया और कुछ करोड़ रुपये में एनआरआई सिटी के निदेशकों से सौदा कर लिया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि पहले और दूसरे एग्रीमेंट में गवाह राजबहादुर था, जो राजाराम वर्मा हत्याकांड में नामजद आरोपी है। पुलिस इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
शहर में चर्चा का विषय
पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ कचहरी परिसर बल्कि शहर भर में हलचल मचा दी है। कानून के रखवाले और कानून के जानकार आमने-सामने आ जाने से हालात कितने संवेदनशील हो सकते हैं, इसकी तस्वीर नवाबगंज थाने में देर रात तक देखने को मिली।






