डिजिटल गोल्ड में निवेश शरीयत के खिलाफ, मुस्लिम ऑनलाइन खरीद-फरोख्त से बचें
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संवाद 24 संवाददाता। डिजिटल माध्यम से सोने में निवेश को लेकर मुस्लिम समाज के लिए एक अहम फैसला सामने आया है। कानपुर में कुल हिंद इस्लामिक इल्मी अकादमी की ओर से आयोजित बैठक में उलमा ने स्पष्ट किया कि मोबाइल ऐप या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल गोल्ड की खरीद-फरोख्त शरीयत के अनुरूप नहीं है। इसलिए मुस्लिम समाज को इस तरह के निवेश से परहेज करना चाहिए।
रजबी रोड स्थित जमीयत बिल्डिंग में हुई इस बैठक में डिजिटल सोने की प्रकृति और उसके लेन-देन पर विस्तार से चर्चा की गई। उलमा ने कहा कि डिजिटल गोल्ड में निवेश शेयर बाजार की तरह उतार-चढ़ाव पर आधारित होता है। कीमत बढ़ने पर धनराशि बढ़ जाती है और घटने पर नुकसान होता है, जबकि इसमें वास्तविक रूप से सोना खरीदार के कब्जे में नहीं आता। सोना केवल आभासी (वर्चुअल) रूप में दर्शाया जाता है, जो शरीयत की शर्तों को पूरा नहीं करता।
उलमा का मत था कि इस्लामी कानून के अनुसार सोने की खरीद-फरोख्त में वस्तु का वास्तविक अस्तित्व और उसका तत्काल कब्जा (कब्ज़ा) आवश्यक होता है। ऐप के माध्यम से होने वाले डिजिटल निवेश में यह शर्त पूरी नहीं होती। इसलिए मुस्लिम समुदाय को ऑनलाइन डिजिटल गोल्ड की खरीद-फरोख्त से बचते हुए नकद और प्रत्यक्ष लेन-देन को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण मसले पर भी विचार किया गया। उलमा ने स्पष्ट किया कि सर्दी के मौसम में मस्जिदों में नमाजियों की सुविधा के लिए फोम या गद्देदार शीट बिछाने में शरीयत की दृष्टि से कोई आपत्ति नहीं है और इस पर नमाज पढ़ना पूरी तरह जायज है।
इस बैठक में मुफ्ती इकबाल अहमद कामसी, मौलाना खलील अहमद मजाहिरी, मुफ्ती अब्दुर्रशीद कासमी, मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह, मौलाना अनीस खान कासमी, मौलाना इनामुल्लाह कासमी सहित कई प्रमुख उलमा मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि आधुनिक वित्तीय साधनों को अपनाने से पहले उनकी शरीयत के अनुसार जांच-परख आवश्यक है।






