200 करोड़ की इमारत में दरार, सवालों के घेरे में सरकारी निर्माण की गुणवत्ता
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संवाद 24 संवाददाता। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज की आठ मंजिला सुपरस्पेशियलिटी बिल्डिंग में आई दरार ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह अत्याधुनिक इमारत अभी महज 16 माह पहले ही लोकार्पित की गई थी, जबकि निर्माण कार्य की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी। इतनी कम अवधि में दीवार में एक फीट तक गहरी दरार सामने आना चौंकाने वाला है।
इस मामले को तब तूल मिला जब कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामनाथ सिकरवार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया। वीडियो में वह इमारत की दरार में लोहे की छड़ डालकर निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते नजर आते हैं। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण में भारी लापरवाही बरती गई है। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं, लेकिन ऐसी गंभीर खामियां उनकी नजर से कैसे बच जाती हैं, यह समझ से परे है।
वीडियो के दौरान उन्हें रोकने की कोशिश करते सुरक्षाकर्मी भी दिखाई देते हैं, लेकिन कांग्रेस जिलाध्यक्ष बिना रुके अपनी बात रखते हैं। उन्होंने डीन को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ एफआईआर करानी है तो करा लें। साथ ही उन्होंने इंजीनियरों और प्रशासन पर कमीशनखोरी के आरोप लगाए और भाजपा सरकार तथा गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा।
वीडियो वायरल होने के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज प्रशासन हरकत में आया और संबंधित हिस्से की मरम्मत कराई गई। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने सफाई देते हुए कहा कि डक्ट वाली जगह पर दरार आई थी, जिसे ठीक करा दिया गया है। उनका कहना है कि नई इमारत में यदि कहीं भी कोई कमी सामने आती है तो उसे तुरंत दुरुस्त कराया जा रहा है।
हालांकि सवाल यह है कि जब इमारत को लोकार्पण से पहले तकनीकी जांच और गुणवत्ता परीक्षण से गुजरना चाहिए था, तो इतनी बड़ी खामी कैसे रह गई? स्वास्थ्य जैसी संवेदनशील सेवा से जुड़ी इमारत में निर्माण की कमजोर गुणवत्ता न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
यह मामला केवल एक दरार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता नियंत्रण की जरूरत को रेखांकित करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इसे महज मरम्मत तक सीमित रखता है या पूरे निर्माण की तकनीकी जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है।






