फ्रांस के बुजुर्ग जोड़े ने भारतीय संस्कृति से प्रेरित होकर रचाई हिंदू रीति-रिवाज से शादी
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संवाद 24 संवाददाता। आगरा प्रेम की अमर मिसाल ताजमहल देखने आए फ्रांस के बुजुर्ग जोड़े पर भारतीय संस्कृति का ऐसा असर पड़ा कि उन्होंने अपने रिश्ते को सात जन्मों के बंधन में बांधने का निर्णय ले लिया। मंगलवार को फिलिप और सिल्विया ने राधाकृष्ण मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए और सात वचन निभाने का संकल्प किया।
ताज से शुरू हुई नई कहानी
फिलिप और सिल्विया वर्षों से एक-दूसरे के जीवनसाथी हैं, लेकिन भारत यात्रा के दौरान ताजमहल की प्रेमकथा और उसकी आध्यात्मिक गहराई ने उन्हें भीतर तक छू लिया। ताज के संगमरमर में उकेरे गए प्रेम ने जैसे उनके मन में यह विश्वास और मजबूत कर दिया कि विवाह केवल सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि आत्मिक जुड़ाव है। इसी भावना से प्रेरित होकर दोनों ने हिंदू पद्धति से विवाह करने का फैसला लिया।
मंदिर में सजी संस्कृतियों की संगम-घड़ी
भारतीय परिधानों में सजे-धजे फिलिप और सिल्विया जब मंदिर पहुंचे, तो वहां मौजूद श्रद्धालुओं की निगाहें ठहर गईं। पुजारी ने विधि-विधान से पूजन कराया, वरमाला की रस्म हुई और फिर वैदिक मंत्रों के साथ सात फेरे पूरे किए गए। अग्नि के समक्ष लिए गए वचनों ने इस पल को और भी पावन बना दिया। स्थानीय लोगों ने फूलों की वर्षा कर नवदंपती को आशीर्वाद दिया—यह दृश्य भारतीय और विदेशी संस्कृतियों के सुंदर संगम का प्रतीक बन गया।
यह हमारे जीवन का सबसे यादगार क्षण
टूर ऑपरेटर पंकज शर्मा के अनुसार, यह जोड़ा पिछले एक महीने से भारत के विभिन्न शहरों का भ्रमण कर रहा है। आगरा पहुंचते ही ताजमहल ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने तुरंत विवाह का निर्णय ले लिया।
शादी के बाद सिल्विया और फिलिप ने कहा, “भारतीय संस्कृति में विवाह सिर्फ समझौता नहीं, बल्कि पवित्र आध्यात्मिक बंधन है। यहां की परंपराओं ने हमें भीतर तक छुआ है। यह पल हमारे जीवन का सबसे यादगार क्षण रहेगा।
प्रेम की भाषा, जो सीमाएं नहीं जानती
फ्रांस से आए इस बुजुर्ग जोड़े की कहानी बताती है कि प्रेम और आस्था की कोई सीमा नहीं होती। ताजमहल की छाया में जन्मी यह शादी भारतीय संस्कृति की उस शक्ति को रेखांकित करती है, जो दुनिया भर के लोगों को जोड़ती है—जहां भाषा, उम्र और देश की दीवारें प्रेम के आगे छोटी पड़ जाती हैं।






