उंधियू: गुजरात की पारंपरिक रसोई का स्वाद, जब मौसमी सब्जियाँ बन जाती हैं स्वाद का उत्सव

संवाद 24 डेस्क। भारत की पारंपरिक पाक कला में कुछ व्यंजन ऐसे हैं, जो केवल भोजन नहीं, बल्कि किसी क्षेत्र की संस्कृति, मौसम और जीवनशैली का परिचय भी देते हैं। गुजरात का प्रसिद्ध व्यंजन उंधियू ऐसा ही एक खास पकवान है। इसमें सर्दियों में मिलने वाली ताजी सब्जियों, सुगंधित मसालों, हरी मेथी, नारियल, मूंगफली और बेसन से तैयार मिश्रण का ऐसा मेल होता है, जो स्वाद और बनावट के लिहाज से इसे विशिष्ट बनाता है। गुजरात के सूरत और दक्षिणी गुजरात के क्षेत्रों में उंधियू विशेष रूप से लोकप्रिय है। समय के साथ यह व्यंजन पूरे गुजरात और देश के दूसरे हिस्सों में भी पसंद किया जाने लगा है।

उंधियू की खासियत केवल इसकी सामग्री में नहीं, बल्कि इसे बनाने की पारंपरिक विधि में भी छिपी है। इसमें अलग-अलग सब्जियों को उनकी प्रकृति के अनुसार तैयार करके मसालेदार मिश्रण के साथ पकाया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे मिट्टी के बर्तन में उलटा करके धीमी आँच पर पकाने की विधि से जोड़ा जाता है। इसी पारंपरिक प्रक्रिया से इसके नाम की उत्पत्ति भी मानी जाती है। आधुनिक रसोई में इसे भारी तले की कड़ाही, प्रेशर कुकर या सामान्य बर्तन में भी बनाया जा सकता है।
उंधियू का इतिहास और गुजराती संस्कृति से इसका संबंध
उंधियू गुजरात के मौसमी खानपान की एक महत्वपूर्ण पहचान है। इसका पारंपरिक रूप विशेष रूप से सर्दियों में तैयार किया जाता है, जब ताजी फलियाँ, छोटे बैंगन, शकरकंद, रतालू और अन्य स्थानीय सब्जियाँ उपलब्ध होती हैं। गुजरात की कृषि और खाद्य संस्कृति में मौसमी उपज का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उंधियू इसी परंपरा का स्वादिष्ट उदाहरण है।

इस व्यंजन का नाम गुजराती शब्द ‘उंधु’ से जुड़ा माना जाता है, जिसका अर्थ उलटा होता है। पारंपरिक विधि में सब्जियों और मसालों को मिट्टी के बर्तन में रखकर उसे उलटा करके धीमी आँच पर पकाया जाता था। हालाँकि आज इसकी कई आधुनिक विधियाँ प्रचलित हैं, लेकिन धीमी आँच पर सब्जियों को उनके रस और मसालों के साथ पकाने का मूल विचार अब भी इसकी पहचान है।
गुजरात में उंधियू को विशेष अवसरों, पारिवारिक भोज और सर्दियों के उत्सवों में बनाया जाता है। उत्तरायण यानी मकर संक्रांति के आसपास भी यह कई परिवारों के भोजन का हिस्सा होता है। इसे अक्सर पूरी, रोटी या अन्य गुजराती व्यंजनों के साथ परोसा जाता है। क्षेत्र और परिवार के अनुसार इसकी सामग्री, मसालों और पकाने की शैली में अंतर देखने को मिलता है।

उंधियू की विशेषताएँ: एक ही व्यंजन में अनेक स्वाद
उंधियू की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता है। इसमें मीठे स्वाद वाली शकरकंद, हल्की मिट्टी जैसी सुगंध वाला रतालू, बैंगन, आलू और विभिन्न प्रकार की फलियों का उपयोग किया जा सकता है। इन सब्जियों के साथ हरी मेथी से बने मुठिया, नारियल, मूंगफली, धनिया और हरी मिर्च का मसालेदार मिश्रण मिलकर एक समृद्ध स्वाद तैयार करता है।
इस व्यंजन में स्वाद का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण है। मूंगफली और तिल इसे हल्की मेवेदार सुगंध देते हैं, नारियल स्वाद में गहराई लाता है, जबकि हरा धनिया, अदरक और हरी मिर्च ताजगी तथा तीखापन प्रदान करते हैं। मेथी के मुठिया इसमें अलग बनावट जोड़ते हैं। कुछ पारंपरिक विधियों में गुड़ या चीनी की थोड़ी मात्रा भी मिलाई जाती है, जिससे गुजराती भोजन में पसंद किए जाने वाले हल्के मीठे स्वाद का संतुलन बनता है।

उंधियू बनाने के लिए संपूर्ण सामग्री
नीचे दी गई सामग्री लगभग 5–6 लोगों के लिए पर्याप्त है। सब्जियों की उपलब्धता और पसंद के अनुसार इनमें थोड़ा बदलाव किया जा सकता है।

  1. मुख्य सब्जियों के लिए सामग्री
    छोटे बैंगन – 5–6
    छोटे आलू – 3–4
    शकरकंद – 1 मध्यम आकार की
    रतालू – लगभग 200 ग्राम
    सुरती पापड़ी या अन्य चपटी फलियाँ – 200 ग्राम
    ताजी हरी फलियाँ – 100 ग्राम
    कच्चा केला – 1, वैकल्पिक
    हरा लहसुन – 2–3 बड़े चम्मच बारीक कटा हुआ, वैकल्पिक
    तेल – 4–5 बड़े चम्मच
    पानी – आवश्यकतानुसार
    नमक – स्वादानुसार
  2. मसाला मिश्रण के लिए सामग्री
    ताजा हरा धनिया – 1 कप
    कसा हुआ ताजा नारियल – आधा कप
    मूंगफली का मोटा पाउडर – आधा कप
    सफेद तिल – 2 बड़े चम्मच
    अदरक – 1 बड़ा टुकड़ा
    हरी मिर्च – 3–4
    नींबू का रस – 1–2 बड़े चम्मच
    चीनी या गुड़ – 1–2 छोटे चम्मच, वैकल्पिक
    धनिया पाउडर – 2 छोटे चम्मच
    जीरा पाउडर – 1 छोटा चम्मच
    हल्दी पाउडर – आधा छोटा चम्मच
    लाल मिर्च पाउडर – आधा से 1 छोटा चम्मच
    गरम मसाला – आधा छोटा चम्मच, वैकल्पिक
    नमक – स्वादानुसार
  3. मेथी के मुठिया बनाने की सामग्री
    ताजी मेथी – 1 कप बारीक कटी हुई
    बेसन – आधा कप
    गेहूँ का आटा – 2 बड़े चम्मच
    अदरक-मिर्च का पेस्ट – 1 छोटा चम्मच
    हल्दी – एक चौथाई छोटा चम्मच
    लाल मिर्च पाउडर – आधा छोटा चम्मच
    धनिया पाउडर – आधा छोटा चम्मच
    चीनी – आधा छोटा चम्मच, वैकल्पिक
    नींबू का रस – 1 छोटा चम्मच
    नमक – स्वादानुसार
    तेल – 1–2 छोटे चम्मच, आटे में मिलाने के लिए
    तलने या सेंकने के लिए तेल – आवश्यकतानुसार

तैयारी का पहला चरण: सब्जियों को सही ढंग से तैयार करें
उंधियू बनाने की शुरुआत सब्जियों की सफाई से होती है। सबसे पहले सभी सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। आलू, शकरकंद और रतालू का छिलका आवश्यकतानुसार उतारकर उन्हें मध्यम आकार के टुकड़ों में काटें। छोटे आलू और बैंगन को साबुत भी रखा जा सकता है। यदि बैंगन साबुत इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उनमें लंबाई की दिशा में दो चीरे लगाएँ, लेकिन ध्यान रखें कि वे पूरी तरह अलग न हो जाएँ।
सुरती पापड़ी या उपलब्ध फलियों के दोनों सिरों को हटाकर उन्हें साफ करें। यदि फलियों पर रेशे हों, तो उन्हें निकाल दें। कच्चा केला इस्तेमाल करना हो, तो उसे छीलकर टुकड़ों में काट लें। काटी हुई सब्जियों को अलग-अलग रखें, ताकि पकाते समय उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार बर्तन में डाला जा सके।
सब्जियों का आकार बहुत छोटा न रखें। बड़े और लगभग समान आकार के टुकड़े धीमी आँच पर अच्छी तरह पकते हैं और आसानी से टूटते भी नहीं हैं। यदि कुछ सब्जियाँ दूसरी सब्जियों की तुलना में जल्दी पकती हैं, तो उन्हें बाद में डालना बेहतर होता है।

दूसरा चरण: उंधियू का असली स्वाद तैयार करने वाला मसाला
एक बड़े बर्तन में बारीक कटा हरा धनिया, कसा हुआ नारियल, मूंगफली का मोटा पाउडर और तिल डालें। इसमें अदरक-मिर्च का पेस्ट, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर, हल्दी, लाल मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाएँ। अब नींबू का रस और इच्छानुसार थोड़ी चीनी या गुड़ डालकर सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें।
मसाला बहुत सूखा लगे, तो उसमें एक या दो बड़े चम्मच पानी या थोड़ा तेल मिलाया जा सकता है। ध्यान रखें कि मिश्रण इतना गाढ़ा हो कि उसे बैंगन के चीरों में भरा जा सके और दूसरी सब्जियों पर भी अच्छी तरह लगाया जा सके।
अब तैयार मसाले का थोड़ा हिस्सा अलग रख लें। छोटे बैंगन में मसाला भरें और शेष मसाले को आलू, शकरकंद, रतालू तथा फलियों के साथ मिलाएँ। इस प्रक्रिया से सब्जियों के प्रत्येक हिस्से में मसाले का स्वाद पहुँचता है।

तीसरा चरण: मेथी के मुठिया कैसे बनाएँ?
उंधियू में मेथी के मुठिया विशेष स्थान रखते हैं। इन्हें बनाने के लिए बारीक कटी मेथी को एक बड़े बर्तन में लें। इसमें बेसन, गेहूँ का आटा, अदरक-मिर्च का पेस्ट, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, नमक और इच्छानुसार थोड़ी चीनी मिलाएँ। नींबू का रस और थोड़ा तेल डालकर सभी सामग्री को मिलाएँ।
मेथी में मौजूद नमी के कारण मिश्रण अपने आप कुछ गीला हो जाता है। इसलिए पानी एक साथ न डालें। जरूरत पड़ने पर थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर नरम, लेकिन आकार देने योग्य आटा तैयार करें। अब इस मिश्रण से छोटे अंडाकार या लंबे मुठिया बना लें।
मुठिया तैयार करने के दो सामान्य तरीके हैं। पारंपरिक स्वाद के लिए इन्हें मध्यम आँच पर हल्का सुनहरा होने तक तला जा सकता है। अपेक्षाकृत कम तेल इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इन्हें भाप में पकाकर या थोड़े तेल में ढककर सेंककर भी तैयार किया जा सकता है। तले हुए मुठिया अधिक कुरकुरे होते हैं, जबकि भाप में पके मुठिया अपेक्षाकृत नरम रहते हैं। तैयार मुठिया अलग रख दें।

चौथा चरण: सब्जियों को धीमी आँच पर पकाने की विधि
अब एक भारी तले वाली कड़ाही या मोटे तले का बर्तन लें। उसमें तेल गर्म करें। चाहें तो थोड़ा जीरा डालकर उसका तड़का लगा सकते हैं। इसके बाद फलियाँ और वे सब्जियाँ डालें जिन्हें पकने में अधिक समय लगता है। इनके ऊपर तैयार मसाला फैलाएँ और हल्के हाथ से मिलाएँ।
अब मसाले से भरे बैंगन, आलू, शकरकंद और रतालू डालें। ध्यान रखें कि बैंगन टूटें नहीं। यदि सब्जियाँ बहुत सूखी लग रही हों, तो थोड़ा पानी डालें। उंधियू का पारंपरिक स्वाद सब्जियों को सीमित नमी में धीमी आँच पर पकाने से विकसित होता है, इसलिए बहुत अधिक पानी डालने से बचें।
बर्तन को ढककर धीमी से मध्यम आँच पर पकाएँ। बीच-बीच में सब्जियों को सावधानी से पलटें, ताकि वे तले में चिपकें नहीं। जरूरत पड़ने पर थोड़ा पानी और डाल सकते हैं। सब्जियों को पकने में लगभग 25–40 मिनट लग सकते हैं। वास्तविक समय सब्जियों के आकार, उनकी ताजगी और बर्तन के प्रकार पर निर्भर करेगा।
जब सब्जियाँ लगभग पक जाएँ, तब तैयार मेथी के मुठिया डालें। इन्हें हल्के हाथ से मिलाएँ और लगभग 8–10 मिनट तक ढककर पकाएँ। मुठिया मसाले और सब्जियों के रस को सोखते हैं, जिससे पूरे व्यंजन में स्वाद का अच्छा संतुलन बनता है।
अंत में एक टुकड़े को काटकर देखें कि सब्जियाँ अंदर तक नरम हो गई हैं या नहीं। आलू और रतालू में चाकू आसानी से प्रवेश करना चाहिए। यदि वे अभी सख्त हैं, तो कुछ मिनट और पकाएँ। तैयार उंधियू में गाढ़ा मसालेदार मिश्रण होना चाहिए, लेकिन वह इतना सूखा भी न हो कि सब्जियाँ आपस में चिपक जाएँ।

उंधियू बनाते समय किन गलतियों से बचें?
उंधियू स्वादिष्ट बनाने के लिए केवल अच्छी सामग्री पर्याप्त नहीं है; पकाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पहली गलती है बर्तन में बहुत अधिक पानी डाल देना। ऐसा करने पर सब्जियों का मसाला पतला हो जाता है और व्यंजन का पारंपरिक गाढ़ापन कम हो सकता है। पानी हमेशा थोड़ी मात्रा में डालें और जरूरत के अनुसार बढ़ाएँ।
दूसरी गलती है सभी सब्जियों को एक साथ डालकर तेज आँच पर पकाना। इससे कुछ सब्जियाँ गल सकती हैं, जबकि दूसरी अंदर से कच्ची रह सकती हैं। सब्जियों के आकार और पकने में लगने वाले समय को ध्यान में रखना जरूरी है।
तीसरी गलती है बार-बार तेज हाथ से चलाना। इससे छोटे बैंगन, आलू और शकरकंद टूट सकते हैं। इसके बजाय चौड़े चम्मच से धीरे-धीरे सब्जियों को पलटें। मुठिया डालने के बाद भी बहुत सावधानी रखें।
चौथी बात, मसालों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। बहुत अधिक मिर्च, गुड़ या नींबू का रस डालने से सब्जियों का प्राकृतिक स्वाद दब सकता है। इसलिए शुरुआत में सीमित मात्रा डालें और पकने के बाद स्वाद के अनुसार समायोजन करें।

उंधियू को परोसने का सही तरीका
उंधियू को गर्मागर्म परोसना सबसे अच्छा रहता है। इसे पारंपरिक गुजराती पूरी के साथ परोसा जाता है। इसके अलावा रोटी, फुल्का या बाजरे की रोटी भी अच्छे विकल्प हैं। साथ में हरी चटनी, नींबू के टुकड़े या हल्का सलाद रखा जा सकता है।
परोसते समय ध्यान रखें कि प्रत्येक प्लेट में अलग-अलग सब्जियाँ और कुछ मेथी के मुठिया जरूर हों। ऊपर से थोड़ा ताजा कटा हरा धनिया और इच्छानुसार थोड़ा कसा नारियल डालने से इसकी सुगंध और प्रस्तुति बेहतर होती है।
उंधियू को पारिवारिक भोजन या विशेष अवसरों पर मुख्य व्यंजन के रूप में रखा जा सकता है। यदि भोजन में पहले से कई तले हुए व्यंजन हों, तो उंधियू में तेल की मात्रा सीमित रखना स्वाद और संतुलन दोनों के लिहाज से उपयोगी है।

उंधियू का पोषण पक्ष: स्वाद के साथ विविधता
उंधियू में कई प्रकार की सब्जियों का उपयोग होने के कारण इससे आहार में विविधता आती है। शकरकंद और आलू कार्बोहाइड्रेट प्रदान करते हैं, जबकि फलियाँ आहार में रेशा और कुछ मात्रा में वनस्पति प्रोटीन जोड़ती हैं। हरी मेथी, धनिया और अन्य सब्जियाँ भी अलग-अलग सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराती हैं।
मूंगफली, तिल और नारियल से वसा मिलती है, जो स्वाद और ऊर्जा में योगदान देती है। बेसन से बने मुठिया भी प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का स्रोत होते हैं। हालांकि, उंधियू का वास्तविक पोषण उसकी सामग्री, तेल की मात्रा और परोसी गई मात्रा पर निर्भर करता है। इसे किसी रोग का उपचार या अपने आप में संपूर्ण संतुलित आहार नहीं मानना चाहिए।
यदि हल्का संस्करण बनाना हो, तो मुठिया तलने के बजाय भाप में पकाएँ, तेल सीमित रखें और सब्जियों की मात्रा बढ़ाएँ। मूंगफली या तिल से एलर्जी रखने वाले लोगों को संबंधित सामग्री हटाकर उपयुक्त विकल्प चुनना चाहिए।

परंपरा, मौसमी उपज और घरेलू स्वाद का सुंदर मेल
उंधियू गुजराती पाक परंपरा का ऐसा व्यंजन है, जिसमें स्थानीय सब्जियों, सुगंधित मसालों और धीमी आँच पर पकाने की कला का सुंदर संगम दिखाई देता है। इसकी खासियत यह है कि हर सब्जी अपना अलग स्वाद और बनावट बनाए रखती है, फिर भी मसालों के साथ मिलकर एक सामंजस्यपूर्ण व्यंजन बनाती है।
इसे बनाने में थोड़ी तैयारी और धैर्य जरूर लगता है, लेकिन सही क्रम से सब्जियाँ तैयार करने, संतुलित मसाला बनाने और धीमी आँच पर पकाने से इसका स्वाद निखरकर सामने आता है। पारंपरिक मेथी के मुठिया इसकी पहचान को और मजबूत बनाते हैं।
सर्दियों की ताजी सब्जियों से तैयार उंधियू केवल पेट भरने वाला भोजन नहीं, बल्कि मौसम के अनुसार खाने और क्षेत्रीय पाक परंपराओं को सहेजने का एक सुंदर उदाहरण है। जब इसे गर्मागर्म पूरी या रोटी के साथ परिवार के बीच परोसा जाता है, तो यह गुजराती रसोई की आत्मीयता और विविधता का स्वादिष्ट अनुभव बन जाता है।

Radha Singh
Radha Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *