पुलिस की जेब में अपराधियों की कुंडली! यक्ष ऐप से मुरादाबाद में बदलेगा कानून-व्यवस्था का खेल
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संवाद 24 मुरादाबाद। जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मुरादाबाद पुलिस ने नए साल की शुरुआत एक बड़े तकनीकी और प्रशासनिक बदलाव के साथ की है। अपराध नियंत्रण, निगरानी तंत्र और पुलिस-जनता संवाद को मजबूत करने के उद्देश्य से जिले में यक्ष (Yaksh) ऐप को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के साथ पुलिस की बीट प्रणाली में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे पुलिसिंग का स्वरूप पहले से कहीं अधिक तकनीक-आधारित और जवाबदेह बनने की उम्मीद है।
मुरादाबाद पुलिस प्रशासन का मानना है कि बदलते अपराध के तरीकों और अपराधियों की बढ़ती तकनीकी समझ को देखते हुए अब पारंपरिक पुलिसिंग पर्याप्त नहीं रह गई है। इसी कारण डिजिटल साधनों और डेटा-आधारित निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। यक्ष ऐप इसी सोच का परिणाम है, जो बीट स्तर तक पुलिसकर्मियों को अपराधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराएगा।
यक्ष ऐप के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सबसे पहले जिले में लंबे समय से एक ही थाने में तैनात पुलिसकर्मियों की पहचान की जा रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ऐसे पुलिसकर्मी जो पिछले ढाई वर्षों से एक ही थाने में कार्यरत हैं, उनका स्थानांतरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इसका उद्देश्य पुलिसिंग में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी प्रकार के स्थानीय प्रभाव या पक्षपात की संभावना को समाप्त करना है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में तैनाती से कई बार कार्यशैली प्रभावित होती है और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। इसलिए यक्ष ऐप के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी सुधार को जरूरी माना गया है। स्थानांतरण की यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी, ताकि कानून-व्यवस्था पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
इसी क्रम में जिले की बीट व्यवस्था का भी पुनर्गठन किया गया है। मुरादाबाद में अब तक 980 बीटें संचालित हो रही थीं, जिन्हें बढ़ाकर 1080 कर दिया गया है। नई बीटों के गठन से पुलिस की पहुंच मोहल्लों और संवेदनशील क्षेत्रों तक और अधिक मजबूत होगी। इससे प्रत्येक बीट प्रभारी पर क्षेत्रीय जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होगी और निगरानी का दायरा भी सीमित लेकिन प्रभावी बनेगा।
बीटों की संख्या बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि पुलिसकर्मी अपने निर्धारित क्षेत्र पर पूरी तरह फोकस कर सकें। छोटे क्षेत्र में काम करने से अपराध की छोटी-से-छोटी गतिविधि पर भी नजर रखी जा सकेगी। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित करना भी आसान होगा, जो अपराध रोकथाम में अहम भूमिका निभाता है।
नई व्यवस्था के तहत बीट प्रभारी की नियुक्ति भी अब पहले की तरह औपचारिक नहीं रहेगी। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बीट प्रभारी की तैनाती इंस्पेक्टर और चौकी प्रभारी स्तर की प्रक्रिया के अनुरूप की जाएगी। इसके लिए चयन से पहले पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता, अनुभव, क्षेत्रीय समझ और कानून-व्यवस्था से जुड़े ज्ञान का आकलन किया जाएगा।
इसके साथ ही संभावित बीट प्रभारियों से साक्षात्कार भी लिया जाएगा, जिसमें उनसे बीट प्रबंधन, अपराध नियंत्रण और स्थानीय समस्याओं को लेकर प्रश्न पूछे जाएंगे। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बीट पर एक ऐसा पुलिसकर्मी तैनात हो जो न केवल प्रशासनिक रूप से सक्षम हो, बल्कि जनता से संवाद करने में भी दक्ष हो।
यक्ष ऐप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अपराधियों की जानकारी को एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। यदि किसी अपराधी के खिलाफ दूसरे जिले में मामला दर्ज है और वह मुरादाबाद क्षेत्र में सक्रिय होता है, तो उसकी जानकारी संबंधित बीट प्रभारी तक तुरंत पहुंच जाएगी। इससे अपराधियों के मूवमेंट पर समय रहते कार्रवाई संभव हो सकेगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई बार अपराधी एक जिले में वारदात करने के बाद दूसरे जिले में जाकर छिप जाते हैं। यक्ष ऐप इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद करेगा। ऐप में उपलब्ध डेटा के माध्यम से अपराधी की पुरानी तस्वीरें, उम्र का अनुमान और आपराधिक इतिहास भी देखा जा सकेगा, जिससे पहचान की प्रक्रिया आसान होगी।
सीसीटीवी फुटेज या अन्य तकनीकी माध्यमों से प्राप्त इनपुट को भी यक्ष ऐप से जोड़ा जाएगा। यदि किसी अपराध की जांच के दौरान संदिग्ध की पहचान आंशिक रूप से होती है, तो ऐप संभावित अपराधियों की सूची तैयार कर सकता है। इससे जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और पुलिस की कार्यकुशलता बढ़ेगी।
यक्ष ऐप को केवल सूचना संग्रह का माध्यम नहीं, बल्कि एक आधुनिक क्राइम इंटेलिजेंस टूल के रूप में विकसित किया गया है। इसमें उपलब्ध डेटा रियल-टाइम अपडेट होता रहेगा, जिससे फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों को हर समय नवीनतम जानकारी मिलती रहेगी। यह प्रणाली अपराध के पैटर्न को समझने और भविष्य की घटनाओं की आशंका को भांपने में भी मददगार साबित हो सकती है।
मुरादाबाद पुलिस का मानना है कि तकनीक के माध्यम से अपराध नियंत्रण की रणनीति अधिक सटीक और प्रभावी बनाई जा सकती है। डेटा-आधारित पुलिसिंग से न केवल अपराध की रोकथाम होगी, बल्कि निर्दोष लोगों को अनावश्यक परेशानियों से भी बचाया जा सकेगा। यह व्यवस्था पुलिस की जवाबदेही भी तय करेगी, क्योंकि हर कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
यक्ष ऐप के साथ बीट पुलिसिंग का उद्देश्य केवल अपराधियों पर नजर रखना नहीं है, बल्कि स्थानीय नागरिकों के साथ पुलिस के रिश्ते को मजबूत करना भी है। बीट प्रभारी को अपने क्षेत्र के लोगों से नियमित संपर्क रखने, उनकी समस्याएं सुनने और समय रहते समाधान करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे पुलिस-जनता के बीच विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि अपराध पर नियंत्रण तभी संभव है, जब जनता पुलिस के साथ सहयोग करे। नई व्यवस्था में बीट प्रभारी स्थानीय स्तर पर भरोसेमंद संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करेगा। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी समय पर पुलिस तक पहुंच सकेगी।
यक्ष ऐप को लागू करने से पहले पुलिसकर्मियों को इसके संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। तकनीकी जानकारी के अभाव में किसी भी प्रणाली का सफल होना मुश्किल होता है, इसलिए इस पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस विभाग का लक्ष्य है कि हर बीट प्रभारी इस ऐप का प्रभावी उपयोग कर सके।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव केवल मुरादाबाद तक सीमित नहीं रहेगा। यदि यह मॉडल सफल साबित होता है, तो इसे उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। राज्य स्तर पर पहले से ही तकनीक-आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है और यक्ष ऐप इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल पुलिसिंग से अपराध के खिलाफ लड़ाई को नई धार मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए डेटा की गुणवत्ता, गोपनीयता और निरंतर निगरानी बेहद जरूरी होगी। यदि इन पहलुओं पर सही ढंग से काम किया गया, तो यक्ष ऐप अपराध नियंत्रण में एक मजबूत हथियार साबित हो सकता है।
नए साल में मुरादाबाद पुलिस द्वारा उठाया गया यह कदम यह संकेत देता है कि कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आधुनिक समाधान अपनाने को तैयार है। बीट व्यवस्था का विस्तार, तैनाती की पारदर्शी प्रक्रिया और तकनीकी निगरानी के माध्यम से पुलिसिंग को एक नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यक्ष ऐप और नई बीट व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव डाल पाती है। यदि यह प्रणाली अपेक्षित परिणाम देती है, तो निस्संदेह यह मुरादाबाद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की पुलिसिंग के लिए एक उदाहरण बन सकती है।






