फुटपाथ वेंडरों को राहत, शहर में 3.23 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होगा नया “वेंडिंग जोन”
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संवाद 24 बांदा। शहर में रेहड़ी-पटरी और फुटपाथ वेंडर अब यहाँ-वहाँ भटकते हुए व्यापार नहीं करेंगे। नगर पालिका परिषद और बीडीए (बांदा विकास प्राधिकरण) के संयुक्त प्रयास से महारााणा प्रताप चौक से कालू कुआं व विकास भवन तक के रास्ते पर 3.23 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक वेंडिंग जोन विकसित करने का निर्णय लिया गया है। यह बदलाव छोटे व्यापारियों के लिए नए वर्ष की शुरुआत में एक बड़ा तोहफा साबित होगा।
वेंडिंग जोन का उद्देश्य और योजना
शहर में फुटपाथ और रेहड़ी पर बैठे छोटे दुकानदारों के लिए स्थिर स्थान की कमी एक पुरानी समस्या रही है। अक्सर इन्हें अतिक्रमण हटाने या विकास कार्यों के नाम पर हटाया जाता रहा है, जिससे उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होती है। ऐसे में इस वेंडिंग जोन की योजना का मुख्य उद्देश्य यही है कि इन्हें एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक स्थान पर व्यापार करने का अवसर मिले और उन्हें रोज-दिन के संघर्ष से राहत मिले।
कहाँ बनेगा ये जोन?
नगर पालिका और बीडीए ने वेंडिंग जोन के लिए महाराणा प्रताप चौक के आसपास के रास्ते को चुना है। इस मार्ग पर सड़क किनारे दोनों ओर फुटपाथ तैयार किए जाएंगे जहां छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले और ठेलेवालों को बैठने और कारोबार करने के लिए सुविधाएँ प्रदान की जाएँगी।
क्या सुविधाएँ उपलब्ध होंगी?
इस वेंडिंग जोन में व्यापारियों को कई प्रकार की अनुकूल सुविधाएँ दी जाएँगी, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
✔ शेडदार चबूतरे और बैठने के लिए ठोस स्थान
✔ पर्याप्त लाइटिंग ताकि शाम में भी व्यापार जारी रहे
✔ फुटपाथ पर व्यवस्थित रूप से बैठने की व्यवस्था
✔ सड़क किनारे साफ-सुथरी और चिन्हित स्टॉल स्पेस
किस तरह खर्च का बँटवारा होगा?
इस परियोजना की कुल लागत लगभग 3.23 करोड़ रुपये है। इस खर्च को नगर पालिका परिषद और बीडीए आधा-आधा हिस्से में साझा करेंगे, जिससे व्यापारियों को बिना भारी बोझ के बेहतर कारोबारी अवसंरचना मिले।
किसने ली पहल?
पर्यवेक्षक बताते हैं कि पिछली माह शहर में कुछ जगहों पर रेहड़ी व्यापारियों को सड़क किनारे से हटाया गया था। व्यापारियों ने अपने रोज़गार संकट को लेकर डीएम/अधिकारियों से अपनी समस्याएँ साझा कीं, और इसके बाद ही यह वेंडिंग जोन विकसित करने की रूपरेखा तैयार की गई। इससे जाहिर होता है कि प्रशासन और व्यापारियों के बीच संवाद के बाद यह पहल रची गई है।
इसका शहर और व्यापारियों पर क्या असर होगा?
विश्लेषण में कहा जा रहा है कि इस वेंडिंग जोन के बनने से शहर की व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि, फुटपाथों की व्यवस्थित उपयोगिता, और रेहड़ी-पटरी वाले व्यापारियों की आमदनी में सुधार होने की संभावनाएँ बढ़ेंगी। इससे एकतरफा व्यापार नियमन के बजाय, एक स्थिर व संरचित व्यवस्था का निर्माण होगा जिससे लोगों को दुकान खोने के भय से मुक्ति मिलेगी।
छोटे व्यापारियों की प्रतिक्रिया
अस्थाई स्टॉल वालों और रेहड़ी-पटरी व्यापारियों के अनुसार यह एक “नए वर्ष का तोहफा” है। वे मानते हैं कि पुरानी जगहों पर बार-बार हटने-बिठाने की समस्या के बाद यह सुव्यवस्थित बाजार उन्हें नयी पहचान, व्यवस्थित ग्राहकों से मिलने का अवसर और आत्मनिर्भरता देने में मदद करेगा।
आगे की कार्ययोजना
अभी वर्तमान में संकट मोचन के सामने वेंडिंग जोन विकसित हो चुका है, लेकिन महाराणा प्रताप चौक से विकास भवन व कालू कुआं की ओर सड़क किनारे यथा समय विकास कार्य किया जाएगा। तैयार रूपरेखा के अनुसार सबसे पहले फुटपाथ का निर्माण और उसके बाद शेड/चबूतरे/लाइटिंग जड़ीं जायेगीँ।
ऐसा क्यों महत्वपूर्ण है?
शहरी नियोजन में वेंडिंग जोन एक ऐसा मॉडल है जो आर्थिक क्रियाशीलता और सार्वजनिक स्थानों की नियंत्रणीयता दोनों को संतुलित करता है। इसे लागू करके बाँदा प्रशासन न केवल व्यापारियों को राहत दे रहा है, बल्कि यह व्यवस्था शहर की सड़क उपयोगिता को भी सुव्यवस्थित कर रही है।
अंततः हम कह सकते हैं कि बांदा में विकसित होने वाला 3.23 करोड़ रुपये का वेंडिंग जोन छोटे व्यवसायियों को स्थिर व्यापार स्थान प्रदान करेगा और शहर के फुटपाथ दुकानदारों की समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान करेगा। यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था, नागरिक सुविधा और नगरपालिका-व्यापारी संवाद का एक सकारात्मक उदाहरण है।






