माघ मेले से पहले साधु-संत क्यों नाराज़ ? प्रयागराज में जमीन और सुविधाओं को लेकर खुला विरोध
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संवाद 24 डेस्क। प्रयागराज में 3 जनवरी से शुरू हो रहे माघ मेले से पहले साधु-संतों और धार्मिक संस्थाओं में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में लगने वाले इस मेले की तैयारियों के बीच संतों का आरोप है कि उन्हें न तो समय पर जमीन मिल रही है और न ही मूलभूत सुविधाएं। हालात ऐसे बन गए हैं कि बीते 20 दिनों से मेला प्राधिकरण कार्यालय में लगातार हंगामा और धरना-प्रदर्शन हो रहा है।
खाक चौक से शुरू हुआ विरोध
विरोध की शुरुआत सबसे पहले खाक चौक के संतों ने की थी। इसके बाद तीर्थ पुरोहित और अन्य धार्मिक संस्थाएं भी आंदोलन में शामिल हो गईं। शनिवार, 27 दिसंबर को मेला प्राधिकरण कार्यालय के बाहर भारी हंगामा हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने वहां बैरिकेडिंग कर दी और आम लोगों की एंट्री रोक दी गई।
संतों के आरोप: सुविधा नहीं, अफसरों के चक्कर
पुष्कर पीठाधीश्वर महंत श्रवण देवाश्रम ने बताया कि उन्हें जमीन तो मिल गई, लेकिन टीन शेड, स्टील पंडाल जैसी बुनियादी सुविधाएं अब तक नहीं दी गईं। उनका कहना है कि वे लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
आचार्य शनि शुक्ला ने कहा कि उन्हें चार दिन पहले ही जमीन मिली है, जबकि माघ मेला शुरू होने में कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में तैयारी करना लगभग असंभव हो गया है।
पैसे मांगने और अपमान का आरोप
वृंदावन से आए संत गोपाल नंद गिरि महाराज ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जमीन और सुविधाओं के बदले पैसे मांगे जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि संतों को “लात मारकर भगाया जा रहा है” और घंटों जमीन पर बैठकर अफसरों का इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने पूरे सिस्टम को भ्रष्ट बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
नई संस्थाओं को लेकर भी सवाल
निराश्रय फाउंडेशन के शिवसागर शुक्ला ने कहा कि नई संस्थाओं के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया बेहद कठिन है। उनका आरोप है कि 26 दिसंबर से नई संस्थाओं को जमीन देने की बात कही गई थी, लेकिन उससे पहले ही 46 संस्थाओं को जमीन दे दी गई। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मेला प्राधिकरण का पक्ष
मेला प्राधिकरण का दावा है कि 4900 संस्थाओं को जमीन आवंटित की जा चुकी है और यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। कार्यालय में चस्पा सूचना में कहा गया है कि अब संस्थाएं मूलभूत सुविधाओं के लिए सेक्टर कार्यालयों से संपर्क करें।
मेला अधिकारी ऋषि राज ने कहा कि जमीन आवंटन का कार्य समाप्त हो चुका है और अब सुविधा पर्चियां तेजी से दी जा रही हैं। वहीं, अपर मेला अधिकारी डॉ. दयानंद प्रसाद के संपर्क में न आ पाने की बात भी कही गई।
प्रशासनिक तैयारी पर सवाल
हालांकि प्रशासन अपनी तैयारियों को लेकर आश्वस्त दिख रहा है, लेकिन लगातार हो रहे विरोध और संतों के आरोपों ने माघ मेले की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि मेला शुरू होने से पहले प्रशासन संतों की नाराजगी दूर कर पाता है या नहीं।






