अंगीठी के धुएं से 4 की मौत, PCS अफसर के दोनों बच्चे भी शामिल, कफन हटाकर बच्चों का चेहरा देखते रहे पिता, बोले— अब जीकर क्या करेंगे
Share your love

संवाद 24 छपरा/वाराणसी। बिहार के छपरा में ठंड से बचाव के लिए जलाई गई अंगीठी एक पूरे परिवार के लिए मौत का कारण बन गई। बंद कमरे में अंगीठी से निकली जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण तीन मासूम बच्चों और उनकी नानी की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि चार अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है।
इस हादसे में जान गंवाने वालों में 3 वर्षीय तेजस, 4 वर्षीय अध्याय, 7 महीने की गुड़िया और 70 वर्षीय कमलावती देवी शामिल हैं। तेजस और अध्याय उत्तर प्रदेश कैडर के PCS अधिकारी विजय सिंह के बेटे-बेटी थे। गुड़िया उनकी मौसेरी बहन थी।
अस्पताल में टूट गए पिता
वाराणसी में जिला सहकारी पदाधिकारी के पद पर तैनात PCS अफसर विजय सिंह जैसे ही छपरा सदर अस्पताल पहुंचे, अपने बच्चों के शव देखकर फफक पड़े। वह बार-बार कफन हटाकर बच्चों का चेहरा देखते रहे और कहते रहे—
“बच्चे ही नहीं रहे, तो हम जिंदा रहकर क्या करेंगे…”
उन्होंने बताया कि सिर्फ तीन दिन पहले ही बच्चों को नानी के घर छोड़कर गए थे। जाते वक्त बेटे ने उनसे चिप्स की मांग की थी, जिसे वह पूरा नहीं कर सके।

कैसे हुआ हादसा
परिजनों के मुताबिक, 26 दिसंबर की रात ठंड अधिक होने के कारण घर के एक बड़े हॉल में धान का भूसा और गोबर के उपलों से अंगीठी जलाई गई। कमरा पूरी तरह बंद था। रात में सभी लोग वहीं सो गए।
कार्बन मोनोऑक्साइड गैस धीरे-धीरे कमरे में भरती चली गई। यह गैस बिना गंध और रंग की होती है, इसलिए किसी को खतरे का अहसास नहीं हुआ। गहरी नींद में सो रहे बच्चों और बुजुर्गों को घुटन महसूस ही नहीं हुई।
सुबह मचा हड़कंप
सुबह देर तक जब कोई नहीं उठा, तो दरवाजा खोला गया। कमरे से धुआं बाहर निकला और एक महिला बेहोश हो गई। पड़ोसियों की मदद से सभी को अस्पताल ले जाया गया, जहां चार को मृत घोषित कर दिया गया। चार अन्य को गंभीर हालत में पटना रेफर किया गया है, जहां वे वेंटिलेटर पर हैं।
चेतावनी भी है यह हादसा
विशेषज्ञों के मुताबिक, बंद कमरे में अंगीठी, कोयला या लकड़ी जलाना बेहद खतरनाक है। कार्बन मोनोऑक्साइड गैस सोते हुए व्यक्ति को बिना चेतावनी के मौत की नींद सुला सकती है।






