फर्जी पहचान से आयुष्मान कार्ड घोटाला उजागर, STF ने 7 को दबोचा
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फर्जी पहचान से आयुष्मान कार्ड घोटाला उजागर, STF ने 7 को दबोचालखनऊ से चला रैकेट, मास्टरमाइंड समेत आरोपी गिरफ्तार; 2 हजार से अधिक अपात्रों को दिलाया सरकारी लाभ
संवाद 24 लखनऊ। आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। फर्जी आईडी के जरिए अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए लखनऊ STF ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने अब तक 2,000 से अधिक अपात्र व्यक्तियों को आयुष्मान योजना का लाभ दिलवाया था। STF ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड को भी दबोच लिया है।
STF के अनुसार, पकड़े गए आरोपी लखनऊ, बाराबंकी, प्रतापगढ़, गाजीपुर और इटावा जनपदों से ताल्लुक रखते हैं। इससे पहले इसी गिरोह के दो सदस्य 17 जून 2025 को प्रयागराज के नवाबगंज क्षेत्र से पकड़े गए थे, जिनके पास से 84 फर्जी आयुष्मान कार्ड बरामद हुए थे। उस मामले में प्रयागराज में मुकदमा दर्ज किया गया था।
OTP बाइपास कर जोड़े जाते थे अपात्र नाम
जांच में सामने आया है कि गिरोह साइबर कैफे संचालकों और ISA (Implementation Support Agency) से जुड़े कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से काम कर रहा था। पात्र परिवारों की फैमिली आईडी में OTP बाइपास कर अपात्र लोगों के नाम जोड़े जाते थे। इसके बाद ISA और SHA (State Health Agency) स्तर पर सेटिंग कर कार्ड को अप्रूव कराया जाता था।
एक कार्ड के लिए 6 हजार की वसूली
गिरोह के सरगना चंद्रभान वर्मा ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह प्रति आयुष्मान कार्ड 6 हजार रुपये वसूलता था। इसमें फैमिली आईडी में नाम जोड़ने, ISA और SHA स्तर पर अप्रूवल कराने के लिए अलग-अलग रकम खर्च की जाती थी। अब तक वह करीब 20 लाख रुपये से ज्यादा की रकम कार्ड अप्रूवल के नाम पर दे चुका है।
अस्पताल के अंदर तक नेटवर्क फैला
पूछताछ में यह भी सामने आया कि लखनऊ के कल्याण सिंह कैंसर इंस्टीट्यूट में तैनात एक आयुष्मान मित्र और कंप्यूटर ऑपरेटर की भी इसमें भूमिका रही। फर्जी कार्डों में जिले से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों को ठीक कराकर इन्हीं कार्डों से अलग-अलग अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराया गया और अवैध कमाई की गई।
STF की सख्ती, आगे और गिरफ्तारी संभव
STF अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। सरकारी योजनाओं में इस तरह के फर्जीवाड़े को गंभीर अपराध मानते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह खुलासा एक बार फिर सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।






